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चने की अधिक उपज देगी नई विकसित किस्में “तीज” और “मीरा”

Remove term: चने की नई विकसित किस्में चने की नई विकसित किस्में
Written by bheru lal gaderi

श्रीगंगानगरकृषि अनुसंधान (एआरएस) केंद्र में विगत कई सालों से चने की इन किस्मों पर अनुसंधान कार्य चल रहा था। चने की नई विकसित किस्में तेज(जीएनजी-2144) और मीरा (जीएनजी-2171)  शुरुआती परीक्षणों में कसौटी पर खरी उतरी है। दोनों किस्मों को आगामी रबी की उन्नत कृषि विधियों की सिफारिशों में शामिल कर लिया गया था।

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अब इनके इस्तेमाल के लिए किसानों को जागरूक करने की तैयारी है। किसान इन किस्मों से चने का उत्पादन ले सके, इसके लिए स्थानीय कृषि अनुसन्धान केंद्र पर बीज भी तैयार किए जा रहे है।

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पादप प्रजनन एवं अनुवांशिक विभाग के प्रजनक डॉ. विजय प्रकाश आर्य बताते है की तीज किस्म गत वर्ष जबकि मीरा इस साल मार्च में अधिसूचित की गई। इस साल तीज किस्म का 200 क्विंटल बीज और मीरा किस्म का 600 क्विंटल बीज तैयार किया जायेगा।

चने की नई विकसित किस्म की विशेषताएं

  • किस्में रबी की सिफारिशों में शामिल
  • झुलसा आदि रोगों के प्रति सहनशील
  • कम समय में देगी पूरा उत्पादन

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मीरा (जीएनजी-2171)

मीरा (जीएनजी-2171)  किस्म की निम्न विशेषताएं है।

  1. राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, दिल्ली जैसे – उत्तरी पश्चिमी मैदानी सिंचित क्षेत्र के लिए अधिसूचित
  2. सिंचित क्षेत्रों के लिए समय पर बुवाई के लिए उपयुक्त
  3. दाना मध्यम आकार व सुनहरे रंग का
  4. जड़गलन, विल्ट व झुलसा रोग के प्रति सहनशील
  5. लगभग 150 दिनों में पककर तैयार
  6. उपज 24 क्विंटल प्रति हेक्टेयर

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तीज (जीएनजी-2144)

तीज (जीएनजी-2144) किस्म की निम्न विशेषताएं है।

  1. प्रदेश और उत्तर-पश्चिमी क्षेत्र के लिए अधिसूचित
  2. दोहरे फूल व 20 से 25 प्रतिशत दोहरी फली वाली किस्म
  3. देरी से बुवाई योग्य किस्म
  4. दिसंबर के पहले सप्ताह में भी कर सकते है बुवाई
  5. 130-135 दिनों में फसल पककर तैयार हो जाती है
  6. 23 क्विंटल प्रति हेक्टेयर की औसत उपज

 

उनका कहना है

तीज और मीरा चने की उन्नत किस्में है। इसके गुणों के कारण उम्मीद बंधी है की ये किस्में किसानों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगी।

प्रो. पीएल नेहरा, निदेशक (शोध), स्वामी केशवानंद कृषि विश्वविद्यालय, बीकानेर

स्त्रोत – एग्रोटेक राजस्थान पत्रिका

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