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ग्लोबल मार्केट में हमारी खेती की धमक बढ़ाने का समय

खेती
Written by bheru lal gaderi

भारतीय अर्थव्यवस्था संक्रमण काल से गुजर रही है। सरकार नोटबंदी और नई कर प्रणाली जीएसटी लागू कर अर्थव्यवस्था को स्मार्ट बनाने में जुटी है। मेक इन इंडिया और नया भारत बनाएंगे जैसे नारों के बीच अर्थव्यवस्था की रीड कृषि विश्व बाजार में नई डिमांड बना रही है। कृषि क्षेत्र में देश की क्षमताओं को देखें तो 58 प्रतिशत से भी अधिक परिवार खेती पर निर्भर हैं। आधे से अधिक लोगों को इससे रोजगार मिल रहा है।

देश की जीडीपी में खेती का 17.5% का योगदान है।157.5 मिलियन हेक्टेयर कृषि भूमि के साथ भारत दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा देश है। दुनिया के 20 कृषि जलवायु क्षेत्रों में 15 प्रमुख मौसम भारत में मौजूद हैं। 60 प्रकार की मिट्टी में 46 प्रकार की मिट्टी हमारे पास है। जिससे तरह तरह के कृषि उत्पाद को हम पैदा कर सकते हैं। हमारी ग्रोथ भी अच्छी हैं। सकल मूल्य बढ़ोतरी में 2016-17 में यह 4.9 फीसदी रही है। हालांकि चालू वित्तीय वर्ष में तत्कालीन गिरावट देखी गई।

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भारतीय खाद्य बाजार

भारतीय खाद्य बाजार 1.3 खरब का है और समग्र बढ़ोतरी दर 20% तक मिल रही है। सीएजीआर ने भी संभावना व्यक्त की है कि 2020 तक भारतीय जैविक खाद्य बाजार 3 गुना बढ़ेगा।

देश में खेती सम्बंधित संभावनाएं

खेती को सिर्फ किसानी से नहीं, अर्थ के साथ मिलाकर देखने की जरूरत है। सरकारें साधन जुटाने में कागजों पर प्लान तैयार करने में सफल रही। दिक्कत प्रति एकड़ उत्पादन बढ़ाने और उत्पादित माल को व्यवस्थित मार्केट में देने की है। इससे किसानों को उत्पात का बेहतर मूल्य मिल सके और कृषि उत्पादों को को बाजार मिल सके।

हरित क्रांति के बाद खेती में सहयोगी उद्यमियों में क्षमताओं को विकसित किया है। श्वेत क्रांति का असर यह रहा है कि आज दूध उत्पादन में भारत दुनिया का सबसे बड़ा देश है। इसमें भागीदारी विश्व में 19 प्रतिशत है। स्टेट कॉफी के क्षेत्र में भारत बड़े निर्यातक के रूप में उभर रहा है।

अप्रैल से अगस्त तक 177805 टन कॉफी निर्यात हुई, जिससे 470 मिलियन अमरीकी डालर भारत को मिले। हमारी जलीय मछली की मांग में 130% की बढ़ोतरी हुई है। बीते वर्ष 275 टन अनाज का उत्पादन किया गया। 287 लाख टन फल उत्पादन कर दुनिया का दूसरा बड़ा देश बना।

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एक्सपोर्ट बढ़ाना होगा

विकसित देशों में गिनती का पैमाना विदेशी मुद्रा भंडार बीच में कृषि का योगदान 10% है। अंतर्राष्ट्रीय बाजार में भारतीय कृषि उत्पादों की मांग में भारी वृद्धि हुई है। निर्यात में 8.70% की बढ़ोतरी हुई है।  जबकि हम सिर्फ चावल मसाले निर्यात पर जोर देते हैं। प्रसंकृत खाद्य वस्तुओं का निर्यात देखे तो वित्त वर्ष के शुरुआती दौर में 2.87 बिलियन डालर रहा, जो आने वाले वर्ष में नई संभावनाएं दे रहा है।

फूड प्रोसेसर और निर्यातकों में व्यापार मंच के लिए हुआ समझौता अगर कारगर रहा तो किसानों की आय दोगुनी करने में मदद मिलेगी। ऑनलाइन खाद्य वितरण उद्योग तेजी से बढ़ रहा है। इन सब पहलुओं को देखे तो एक्सपोर्ट के दायरे को बढ़ाने की जरूरत है।  इसके लिए खेती में उत्पादन के साथ प्रसंस्करण के बेहतर नवाचारों को आगे बढ़ाना होगा।

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Author :-

प्रो. प्रशांत सालवन

आईआईएम, इंदौर

स्रोत :-

राजस्थान पत्रिका

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