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गौ विज्ञानी भाई विपिन योगी से एक मुलाकात

विपिन योगी
Written by bheru lal gaderi

सोशल मीडिया में गौ आधारित अर्थव्यवस्था की बातें मैं अक्सर पढ़ता सुनता था लेकिन कभी कलाकार से नमस्ते नही हुई थी। कल रात दस बजे भाई विपिन योगी मिले और बताया के MBA की पढ़ाई पुणे के प्रतिष्ठित कालेज से करके उनका मन भाई राजीव दीक्षित जी की प्रेरणा से गाय और गौ आधारित इकॉनमी की ओर आकर्षित हुए। माता पिता दोनो सरकारी लेक्चरर थे, सो उन्हें अपने जीवन से प्रयोग करने की आजादी मिल गयी।

विपिन योगी

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गौमूत्र खरीदने की गारंटी:-

घर पर खेत जमीन गाय कुछ भी नही था, जान पहचान में लिंक निकाले गए और देसी गाय पालकों की खोज की गई। भाई विपिन योगी ने अपने बुध्दि कौशल से अपना बिजनेस प्लान तैयार किया जिसमें गौपालक को 35 रुपये लीटर दूध और गाय के नाटने के बाद 10 रुपये लीटर गौमूत्र खरीदने की गारंटी दी गयी।

वैदिक रीति से घी बनांना:-

लक्ष्य था वैदिक रीति से घी बनांना। घर की छत पर घी बनाने का उपक्रम करना। पिता जी का संबंध हरियाणा के रेवाड़ी जिले के एक गांव से था उन्होंने बचपन मे हारे देखे हुए थे सो अपने पुरातन ज्ञान को आधार बना कर पिता जी ने हारे बना दिये।

विपिन योगी

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फिर नज़दीक के कस्बे रामगढ़ जहां के मिट्टी के बर्तन मशहूर हैं वहां से कुम्हारों से निवेदन करके पुराने डिज़ाइन के दूध गर्म करने के बर्तन बनवाये।

दूध को हारे पर गर्म करके सुबह से शाम तक ये मोटी मलाई वाला बनाया जाता है। फिर उसे मथने के लिए भी भाई विपिन योगी ने इलेक्ट्रिकल मथानी के साथ वाशिंग मशीन का इलेक्ट्रॉनिक ब्रेन वाला चिप सेट लगा दिया जिससे एक राउंड क्लॉक वाइज दूसरा राउंड एन्टी क्लॉक वाइज वाला सिस्टम सेट हो गया।

विपिन योगी

मक्खन निकाल कर हारे में ही वैदिक रीति से घी बनाने की प्रक्रिया शुरू की, विपिन योगी बताते हैं कि प्रारंभिक दौर में उन्होंने कितना घी जलाया है वो उनका दिल हो जानता है। प्रक्रिया और तापमान ही सेट नही बैठ रहे थे। फिर अभ्यास के बल पर बात उनकी समझ मे बैठ गयी और उनके हाथ जीवन चलाने हेतु माया कमाने की कुंजी लग गयी।

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गौमूत्र अर्क:-

इसके साथ ही इन्होंने गौमूत्र अर्क बनाने के लिए जो डिस्टिलेशन यूनिट बनाई उसे। चालू करने में जब पहली बार दस लीटर गौमूत्र से अर्क बनांना शुरू किया तो 1000 लीटर पानी लग गया, उसके बाद कूलर के पम्प की मोटर के इस्तेमाल के साथ उन्होंने पानी को रीसायकल करने की विधि खोज ली।

विपिन योगी

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आज विपिन योगी एक कामयाब स्वरोजगारी गौ वैज्ञानिक हैं जिनके अलवर शहर में बहुत सारे चाहने वाले हैं, अभी भाई विपिन योगी की उम्र मात्र 25 वर्ष है और उन्हें महृषि वाग्भट्ट और पतंजलि के बहुत सारे प्रैक्टिकल सूत्र याद है।

इनकी कामयाबी का एक ही राज है प्रैक्टिकल करके देखना। एक दिन इन्होंने कहीं सुन लिया के अमरीका और चीन ने गौमूत्र पर पेटेंट्स लिए हैं। उसीदिन से ये उन पटेंट्स की खोज में जुट गए और पांचों पेटेंट्स जिसमे 4 अमरीका और 1 चीन का था खोज निकाला।

अपनी प्रयोगशाला में इन्होंने दीवारें गाय के गोबर से लिपाई करवाई हैं जो बहुत ठंडी रहती हैं।

गौविज्ञानी विपिन योगी बताते हैं के जो गाय दूध देना बंद कर चुकी हो उसका मूत्र बेशकीमती होता है और दूध के भाव भी मिल जाये तो सस्ता है।

विपिन भाई को एक और सहयोगी मिले हैं। भाई देवेंद्र जी जो कि अल्ट्राटेक सीमेंट में बतौर मैनेजर कार्यरत हैं दोनो ने मिलकर शालीमार कालोनी की जमीन पर हर्बल पार्क बनाया है जिसमे दुर्लभ जडी बूटियां लगाई हैं।

विपिन योगी बताते हैं के 10 लीटर गौमूत्र जो कि 100 रुपये का मोल लेकर आते हैं किसान से उसको आसवन विधि
से गुजार कर कुछ ही घण्टों में 2500 रुपये का अर्क तैयार होता है।

अलवर शहर में इस अर्क की बहुत डिमांड है।

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ईंब बताओ भाई के करणा है?

म्हारे तै बड़ा कोई मूरख कोनी जो ऐसे दौर में है जब ये विरासत बचाई जा सके है और दस साल बाद बात हाथ से निकल जायेगी।

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लेखक:-

विपिन योगी

कमलजीत जी

स्रोत:-

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