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गाजर धोने की मशीन – विकसित की अरविन्द सांखला ने

गाजर धोने की मशीन
Written by bheru lal gaderi

जोधपुर जिले के रामपुरा मथानिया गांव में किसी समय मिर्ची की भरपूर पैदावार होती थी लेकिन मोनोक्रॉपिंग के कारण मिर्च में रोग पनपने लगे और पानी कि भूजल गहराई बढ़ने के साथ ही लवणता भी बढ़ गई। तब यहां के किसानों ने गाजर की फसल लेना शुरू किया। यहां से प्रतिदिन 20-25 ट्रक गाजर निर्यात होने लगे, लेकिन गाजरों पर महीन जड़ों के रोम होने के कारण किसानों को सही भाव नहीं मिलता। इससे आहत होकर स्थानीय किसान अरविंद सांखला ने काफी प्रयोगों के बाद गाजर धोने की मशीन (Carrot washing machine) को बनाने में सफलता हासिल कर ही ली।

उनकी नवाचार यात्रा उनके शब्दों में

मैं पिछले 25 सालों से कृषि यंत्र बना रहा हूं मैं खुद काश्तकार हूं और खेती में जरूरत अनुसार सुधार अपनाने की सोच सकता हूं। मेरे द्वारा तैयार गाजर साफ करने वाली इस मशीन की क्षमता तकरीबन 2 क्विंटल तक है। इतनी गाजरों को साफ करने में अब सिर्फ 15 मिनट लगते हैं। इस तरह घंटे भर में करीब 8 क्विंटल का गाजर साफ हो जाती है। इसके विपरीत हाथ से 50 किलो गाजर साफ करने में कम से कम 25 मिनट लगते हैं। मेने दो तरह की मशीनें बनाई है एक तो चेचिस तथा टायर समेत, दूसरी एक ही स्थान पर रखी जा सकने वाली।

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खुबिया जो कारगर साबित हुई

गाजर धोने की मशीन  किसानों का बेशकीमती समय बचाकर ज्यादा गाजर साफ करती है, इसे गाजर का ताजापन बरकरार रहता है। हाथ से साफ की गई गाजर की बजाए मशीन से एक साथ सफाई होने के कारण भाव ज्यादा मिलता है। मशीन की एक खासियत है कि यह ‘थ्री इन वन’ है, ट्रैक्टर, बिजली मोटर और डीजल इंजन तीनों से चलाई जा सकती है। इस मशीन के रोलिंग ड्रम के केंद्र में छिद्रदार पाइप की शाफ़्ट लगती है, जिससे साथ जुड़े वाटर पंप द्वारा अंदर तेज फव्वारा चलता है। इस प्रकार गाजर धुलाई में पानी की 50% बचत हो जाती है। गाजरों की सीजन 4 माह तक चलती है मैं खुद प्रति माह औसतन 20-25 मशीनें बेचता हूं। अब तो कृषि विभाग द्वारा इस पर किसानों को सब्सिडी भी मिलने लगी है।

इंजीनियरिंग की दृष्टि से मशीन के कुछ आंकड़े प्रस्तुत है-

लंबाई-18 मिमी., चौड़ाई- 900 मिमी, ऊंचाई -1050, रोलर का व्यास -900 मिमी,  बेल्ट पुली -4 नग, लोहे का प्रकार-ढलवा लोहा, गियर सेट-300 मिमी., पिनियन 87.5 मिमी., वाटर पंप-65×60 मिमी., गाजर सफाई क्षमता-2000 किलो प्रति घंटा, मशीन भार-630 किलो  बिक्री भाव – 46,500 रूपये प्रति मशीन।

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गाजर धोने की मशीन की कार्यप्रणाली

गाजर धोने की मशीन का सेंट्रल ड्रम वास्तव में दो वृत्ताकार मोटी चकतियों की परिधि पर समान मोटाई की आयरन पत्तियों को थोड़े-थोड़े गैप के साथ जोड़कर बनाया गया है। इससे इस पिंजरे नुमा ड्रम की भीतरी सतह इतनी खुरदरी बन जाती हैं कि इसको घुमाने पर गाजरों पर लगी मिट्टी और महीन झड़े तो रगड़ खाकर साफ हो जाती हैं, गाजरों को खरोच भी नहीं पहुंचती।

इस ड्रम की दोनों वृत्ताकार चकतियों के बीचो-बीच लोहे का खोकला पाइप रहता है, जिस पर थोड़ी-थोड़ी दूर पर पेंसिल डालने लायक छेद होते हैं। यह पाइप वाटर पंप से जुड़ा होता है मशीन चालू करने पर इस छिद्रित पाइप से तेज फव्वारे छूटते हैं जो गोल घूमती ड्रम के अंदर डाली गई गाजरों पर चिपकी मिट्टी और सूक्ष्म रोमावली को तुरंत धो डालते हैं। यह कचरा मिट्टी ड्रम की झुर्रियों में से छनकर पानी समेत बाहर निकल जाता है। अंदर रखी साफ गाजरों को ड्रम का ढक्कन खोल कर सीधे पैक किया जाता है।

गाजर धोने की मशीन को ‘वि-शेप’ स्टैंड पर रखा गया है. मशीन को चेचिस ट्रॉली पर कसा गया है। जिससे एक ही खेत में रखे गए अलग-अलग ढेरो के पास जाकर मौके पर ही धो सकते हैं. इससे धुलाई का दोहरा खर्च नहीं आता। मशीन में पानी की मात्रा घटाने-बढ़ाने के लिए चूड़ीदार नल है, तो ड्रम को खोलने के लिए चिटकनी दार ढक्कन भी।

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अधिक जानकरी के लिए सम्पर्क करे

विजय लक्ष्मी इंजीनियरिंग वर्क्स,

राम कुटिया के सामने,

 नयापुरा, मारवाड़ मथानिया-342305

जिला-जोधपुर (राजस्थान)

फोन नंबर-09414671300

Author :- 

मोईनुद्दीन चिश्ती

कृषि पत्रकार

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