agriculture Horticulture सब्जियां

गाजर की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन

गाजर की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन
Written by Vijay dhangar

गाजर की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन

जड़ वाली सब्जियों में गाजर (Carrot) का प्रमुख स्थान हैं यह पोषक तत्वों से भरपूर होती हैं। खाने योग्य भाग पौधे की जड़ें होती हैं जबकि ऊपरी भाग (पत्तियां) जानवरों के खाने के काम आती हैं। इसको कच्चा एवं पका कर दोनों ही तरह से प्रयोग में लाया जाता है। मांग होने से गाजर के भाव भी किसानों को दूसरी फसलों से अधिक मिलते हैं। परंतु कीट-रोग का समय पर नियंत्रण नहीं किए जाने से फसल में नुकसान लगने का भी डर रहता है। गौरतलब है कि गाजर का उपयोग सलाद, अचार और हलवा बनाने के लिए किया जाता है। गाजर का रस ‘कैरोटीन’ का महत्वपूर्ण स्त्रोत है। भारत में गाजर मुख्य रूप से उत्तर प्रदेश, असम, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब एवं हरियाणा में उगाई जाती है।

 

गाजर की फसल में कीट एवं रोग प्रबंधन

प्रमुख रोग

स्क्लेरोटोनिया विगलन

लक्षण:- पत्तियों, तनों एवं डण्ठलों पर सूखे धब्बे उत्पन्न होते हैं, रोगी पत्तियां पीली होकर झड़ जाती है कभी-कभार तो इसका सारा पौधा भी सूख जाता है।

रोकथाम:- कार्बेंडाजिम 50 डब्ल्यूपी 1 किग्रा 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से एक पखवाड़े (15 दिन के ) के अंतराल पर तीन से चार छिड़काव करें।

Read also:- गाजर धोने की मशीन – विकसित की अरविन्द सांखला ने

चूर्ण रोग

लक्षण:- पौधे के सभी भागों पर सफेद रंग का चूर्ण जमा हो जाता है।

रोकथाम:- चूर्ण रोग के लक्षण आने पर केराथॉन 50 मिली प्रति 100 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

स्र्कोस्पोरा पर्ण अंगमारी

लक्षण:- स्र्कोस्पोरा पर्ण अंगमारी के लक्षण पत्तियां तथा फूल वाले भागों पर दिखाई देते हैं। रोगग्रस्त पत्तियां सिकुड़ जाती है। पत्ती की सतह तथा पर्णवृन्तों पर बने धब्बों का आकार अर्धगोलाकार भूरा या काला होता है। फुल वाले भाग बीज बनने से पहले ही सिकुड़ जाते हैं एवं खराब हो जाते हैं।

रोकथाम:- फसल में रोग के लक्षण दिखाई देने पर मैनकोज़ेब, 25 किग्रा अथवा कॉपर ऑक्सिक्लोराइड 3 किग्रा का 1000 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करें।

Read also:- बेर के बगीचे में कीट एवं रोग प्रबंधन

गाजर में कीट का प्रकोप

गाजर की सुरसुरी (कैरट विविल)

लक्षण:- इस के कीट गाजर के ऊपरी भाग में सुरंग बनाकर नुकसान पहुंचाते हैं।

रोकथाम:- कीट की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 एसएल 1 मिली प्रति 3 लीटर पानी अथवा डाइमिथोएट 30 ईसी 2 मिली प्रति लीटर पानी की दर से घोल तैयार करके छिड़काव करें।

जंग मुखी

लक्षण:- यह किट गाजर की जड़ों में सुरंग बनाते हैं जिस कारण पौधे में पोषक तत्वों का दान-प्रदान बन्द हो जाता हैं एवं पौधा सुख जाता हैं।

रोकथाम:- नियंत्रण के लिए क्लोरपायरीफॉस 2 ईसी का 2.5 लीटर प्रति हेक्टेयर की दर से हल्की सिंचाई के साथ प्रयोग करें।

किसान भाई निम्न प्रकार से सही समय पर रोग एवं बीमारियों का नियंत्रण का उत्पादन को बढ़ा सकते हैं।

Read also:- संकर आम की उन्नत बागवानी एवं प्रबंधन

Author:-

vijay dhangar

विजय गाडरी

B.sc Agriculture

facebook:- https://www.facebook.com/vijay.gaderi.5

 

Facebook Comments

About the author

Vijay dhangar