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गर्मियों में पशुओं का समुचित देखभाल एवं रखरखाव

गर्मियों में पशुओं का समुचित देखभाल एवं रखरखाव
Written by bheru lal gaderi

प्राचीन काल से ही भारत पशुपालन आधारित कृषि प्रधान देश रहा है। मानव द्वारा पशुओं को पालना उनकी देखरेख करना मानव जीवन काल से ही प्रारंभ हो गया था। ग्रीष्म ऋतु में पशुओं की देखभाल की विशेष आवश्यकता होती है। गर्मी के मौसम में बाहरी तापमान ज्यादा होता है,।

गर्मियों में पशुओं का समुचित देखभाल एवं रखरखाव

जिसके फलस्वरुप पशु के शरीर का तापमान बढ़ जाता है, और पशु तनाव ग्रस्त होने लगता है। पशुओं के स्वास्थ्य में गिरावट आने लगती हैं और बीमार पड़ने की संभावना बढ़ जाती है। जिसके कारण पशु में काम करने की क्षमता और उनकी उत्पादन की क्षमता में कमी होने लगती हैं। इसलिए गर्मी के मौसम में पशु का समुचित देखभाल एवं रखरखाव अति आवश्यक है।

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अत्यधिक गर्मी में पशुओं में रोग के लक्षण

  1. भूख में कमी जुगाली बंद करना।
  2. शरीर का तापमान बढ़ना।
  3. लड़खड़ाना।
  4. मुंह खोलकर सांस लेना।
  5. अधिक लार गिरना।
  6. प्यास ज्यादा लगना।
  7. सुखी व खुरदरी त्वचा।

लंबे समय तक अत्यधिक गर्मी में रहने के प्रभाव

  1. गर्मी जन्य तनाव।
  2. शरीर भार में कमी।
  3. दुधारू पशु में दूध की मात्रा कम होना एवं दूध में पोषक तत्वों की कमी होना।
  4. नर पशुओं में वीर्य की गुणवत्ता में गिरावट।
  5. प्रजनन दर में कमी होना।
  6. भ्रूण का मरना वह कमजोर बच्चे का जन्म होना।
  7. रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होना।

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गर्मी से पशुओं को निजात बचाने के उपाय तरीके

पशुओं को गर्मी से बचाने के लिए निम्न बातों बिंदुओं को ध्यान में रखना चाहिए। जिससे पशु के स्वास्थ्य एवं उत्पादन क्षमता की गुणवत्ता को बनाए रखें।

  1. पशुओं की आवास व्यवस्था प्रबंधन
  2. दोपहर के समय पशुओं को घर के अंदर या पेड़ की छांव के नीचे रखना चाहिए।
  3. आवास की छत को पेरा या पत्ते से ढकना चाहिए।
  4. इससे आवास के अंदर गर्मी कम होगी।
  5. पशु आवास की ऊंचाई कम से कम 4 से 5 मीटर होनी चाहिए।
  6. पशु आवास में पर्याप्त मात्रा में खिड़की एवं झरोखा का होना चाहिए। जिससे ताजी हवा आ सके।
  7. दोपहर के समय खिड़की या घर के खुले भाग में पूरी से ढक देना चाहिए और पानी से समय-समय पर भी होना चाहिए।
  8. पशुशाला के आसपास घास पर पेड़ पौधे होने चाहिए इससे आवास के अंदर गर्मी कम होती हैं।
  9. दुधारू पशुओं के लिए कूलर पंखा रखना चाहिए।

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पानी व्यवस्था/प्रबंधन

  1. गर्मियों के दिनों में पशुओं को प्रतिदिन नहलाना चाहिए।
  2. दुधारू पशुओं के लिए पशुशाला के अंदर स्प्रिंकलर, फव्वारा लगा सकते हैं।
  3. पशु को ठंडा साफ सुथरा पानी हर समय उपलब्ध होना चाहिए।
  4. विशेष रूप से भैसों के लिए तालाब होना जरूरी है जिसमें वैसे कुछ देर तक रह सके इससे भैंस का शारीरिक तापमान कम होता है।

पशु आहार/प्रबंधन गर्मियों के मौसम में

  1. पशुओं को हरा चारा देना चाहिए, अगर हरा चारा उपलब्ध ना हो तो पेड़ की पत्ती जैसे आम की पत्ती बबूल की पत्ती जामुन के पत्ते देना चाहिए।
  2. गर्मी में संतुलित राशन देना चाहिए, जिससे पशुओं की उत्पादन क्षमता बनी रहे।
  3. पौष्टिक आहार का मिश्रण खिलाना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर

संघटक

मात्रा (%)

गेहूं की चोकर

20

मकई

15

खली

25

अरहर की चुरी

10

मुंग की चुरी

5

मिनरल मिक्सर एवं नमक

5

चावल की चोकर

20

कुल मात्रा (%)

100

गाय एवं भैंस के लिए चोकर/दाना के मिश्रण

सामग्री

मात्रा (%)

मूंगफली की खली

25

चना

20

जो

15

गेहूं का चोकर

40

कुल मात्रा

100

 

  1. पशु को प्रतिदिन चार से पांच बार खाना देना चाहिए, जो खनिज मिश्रण विटामिन व फीड सप्लीमेंट देना चाहिए।

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पशुओं को चराने की विधि तरीका

  • गर्मी के मौसम में पशुओं को प्रातः काल 9:00 बजे तक एवं शाम 5:00 बजे के बाद चराना चाहिए। क्योंकि इस समय तापमान कम रहता है
  • अगर संभव हो तो पशुओं को रात में चरा सकते हैं। पशु को प्रतिदिन 2 घंटा सुबह एवं 2 घंटा शाम को चराना चाहिए।

लेखक:-

ध्वनि शर्मा एवं अरूणाभ जोशी

आणविक जीव विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग,

राजस्थान कॉलेज एवं एग्रीकल्चर उदयपुर

( राजस्थान)

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