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खेतों में चूहों पर नियंत्रण कर फसल कैसे बचाए?

खेतों में चूहों पर नियंत्रण कर फसल कैसे बचाए
Written by bheru lal gaderi

फसलों के बोने से लेकर उनके प्रसंस्करण तक कई कारक हानि पहुंचाते हैं. इनमें मुख्य हानिकारक जिव चूहे होते हैं जो फसलों को 5 से 15% की हानि पहुंचाते हैं। हमारे देश में चूहों के लगभग 110 प्रजातियां पाई जाती है। घरेलू चूहा, पड़ोसी चूहा, खेत का चूहा एवं जंगली चूहा नामक इनकी चार श्रेणियां हैं। एक जोड़ी चूहा साल भर में 300 से 1200 चूहे पैदा करता है। न केवल खड़ी फसलों में बल्कि भंडारण में अधिक हानि पहुंचाते हैं।

खेतों में चूहों पर नियंत्रण कर फसल कैसे बचाए

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चूहे नुकसान कर रहे हैं, यह कैसे पता चलता है?

चूहे अक्सर रात के समय सक्रिय होते हैं। खेत के निरीक्षण के समय मेड़ों पर चूहों के बिलो को आसानी से पहचाना जा सकता है। इसके अतिरिक्त चूहे द्वारा पौधों को पहचानना आसान है। साधारण किसान खेतों में चूहों की उपस्थिति को अनदेखा कर देते हैं जबकि चूहे अपनी प्रजनन क्षमता के कारण दिनों-दिन बढ़ाते जाते हैं। फसल पकने के समय इनका नियंत्रण इनके संख्या बल के कारण लगभग असंभव हो जाता है, इसलिए सही समय पर इन से निपटने के उपाय करना चाहिए।

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चूहे नुकसान क्यों करते हैं?

चूहों द्वारा नुकसान करने के दो मुख्य कारण है- पहला तो हम जानते हैं कि इनके जीवनयापन हेतु खाना एवं अधिक प्रजनन क्षमता के कारण इनकी संख्या काफी बढ़ जाती है। दूसरा कारण है इनके सामने वाले 1 जोड़ी दांत जो लगातार बढ़ते रहते हैं तथा नुकीले और लंबे होते हैं। इन को सही आकार में रखने के लिए इन की घिसाई करते रहना आवश्यक है। इस कारण चूहे लगातार संपर्क में आने वाली प्रत्येक वस्तु को काटते रहते हैं। और चूहे खाते तो कम हैं मगर नुकसान अधिक करते हैं।

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चूहा नियंत्रण का सही समय क्या है?

फसल की कटाई के बाद खेत खाली हो तब नियंत्रण का तुलनात्मक रुप से आसान होता है। वैसे गर्मियों में, विशेषकर मई-जून में चूहों की संख्या अपेक्षाकृत कम होती हैं, अतः यह समय सर्वोत्तम है।

चूहों को किस प्रकार नियंत्रित किया जाता है?

चूहे किसी एक क्षेत्र विशेष की समस्या नहीं होते हैं। उनके बिल अत्यधिक लंबे और दूर जा कर खुलने वाले होते हैं। यदि चूहा नियंत्रण के सामूहिक प्रयास किया जाए तो ही अपेक्षित परिणाम प्राप्त होते हैं।

फसल कटाई के बाद का समय सामूहिक अभियान हेतु सर्वोत्तम होता है। अर्थात इस समय नियंत्रण अभियान चलाया जाना चाहिए। इस समय खेतों, मेड़ों, तालाबों और अन्य स्थानों पर इनके बिलों को आसानी से पहचाना और देखा जा सकता है। 30-40  ग्रामीण जनो की टोली द्वारा इन बिलो को बंद कर देने से चूहे नष्ट हो जाते हैं।

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क्या यांत्रिक विधि द्वारा भी चूहों का नियंत्रण किया जा सकता है?

जी हां, यदि फसल कटाई के बाद खाली खेतों में पानी भर दिया जाए तो चूहे बाहर निकल आते हैं, जिन्हें लाठियों से पीटकर खत्म किया जा सकता है अथवा पिंजरों के प्रयोग से पकड़कर उन्हें पिंजरे सहित पानी में डुबोकर खत्म किया जा सकता है। परंतु यह कम जनसंख्या में चूहों के नियंत्रण के लिए  हैं। पिंजरों को प्रत्येक उपयोग के बाद धोना आवश्यक है। पिंजरों में ऐसे चारे को रखे जो चूहों को पसंद हो, जैसे की तली हुई अथवा मीठी चीजे चुकी चूहे शंकालु प्रवृत्ति के होते हैं, इसलिए दो-तीन दिन में खाने का सामान तो रखें पर उनमे फंदे न डालें।

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रासायनिक नियंत्रण कैसे किया जाए?

चूहों की प्रकृति शंकालु होती है, इसलिए रासायनिक नियंत्रण हेतु चार-पांच दिन का धैर्य आवश्यक है। इसके लिए पहले दिन जीवित बिलों की पहचान करें। इसके लिए सबसे पहले बिलों को मिट्टी से बंद करें। दूसरे दिन जो बिल खुला मिले, उसमे विष रहित चुग्गा रखे। तीसरे दिन भी यही चुग्गा दोहरावे। चुग्गा बनाने के लिए 1 किग्रा अनाज में 20 ग्राम मूंगफली या तिल्ली का तेल मिलाएं। चौथे दिन इन्हीं बिलों में विष-चुग्गा डालें। विष-चुग्गे को बनाने के लिए 1 किग्रा अनाज में 20 ग्राम तेल और 20 ग्राम जिंक फास्फाइड मिलाएं। लगभग 10 ग्राम विषैला चुग्गा प्रत्येक बिल में डालें।

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विषैला चुग्गा या चारा डालने में कुछ बातों का ध्यान अवश्य रुप से रखे:-

  1. विष-चुग्गा को बिलों के अंदर ही डालें, बिलों के बाहर विषैला-चुग्गा छोड़ने से पशु व पक्षियों को नुकसान हो सकता है।
  2. मरे हुए चूहे और चारा बनाने में प्रयुक्त हुई वस्तुओं को गड्ढा खोदकर मिट्टी में दबाए।
  3. चारा बनाने हेतु हाथों का इस्तेमाल न करें, दस्ताने या पॉलीथिन अवश्य पहने
  4. लगभग 10 दिन बाद रासायनिक नियंत्रण की प्रक्रिया को पुनः दोहराए। परंतु जिंक फास्फाइड का इस्तेमाल न करें बल्कि ऑक्चन रोधी दवा का प्रयोग करें। इस दवा का रासायनिक नाम प्रोयेडिनीयोन है और इसकी मोमी टिकिया कई व्यावसायिक नामों से बाजार में उपलब्ध है। इन टिकियों इस्तेमाल कर बचे हुए चूहों को नष्ट किया जाता है
  5. विषैला-चुग्गा डालते समय पानी, खाना, बीड़ी या सिगरेट का इस्तेमाल न करें।
  6. विष को बच्चों व जानवरों की पहुंच से दूर रखें। खाली डिब्बों को मिट्टी में गहरा मगर जल स्त्रोत से दूर दबाएं।

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चूहों पर नियंत्रण की घुनीकरण विधि क्या है?

जो चूहे रासायनिक नियंत्रण से बच जाते हैं उन्हें जहरीली गैस छोड़ने वाले रसायन एलुमिनियम फास्फेट की टिकिया द्वारा मारा जाता है। इसमें जीवित बिलों की पहचान कर इस दवा की 3 ग्राम वाली आधी टिकिया प्रति बिल के हिसाब से डालकर बिलों को मिट्टी से बंद कर दें। इससे बिलों में जहरीली गैस के रिसने से बिलों में उपस्थित चूहे मर जाते हैं।

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चूहों के प्रकोप से बचने के क्या उपाय हैं?

चूहे के प्रकोप से बचने के लिए

  1. मेड़ों को छोटा और पतला रखना चाहिए।
  2. खरपतवारों से मुक्त खेत होना चाहिए।
  3. खेत की सतत निगरानी करनी चाहिए ताकि अधिक संख्या में बढ़ने के पहले ही नियंत्रण किया जा सके।

लेखक

डॉक्टर किंजल्क सी. सिंह,

कृषि विज्ञान केंद्र, रीवा

स्रोत :-

कृषि परिवर्तन पत्रिका

एल. एम. 14, बी ब्लॉक, मानसरोवर कॉम्प्लेक्स
भोपाल (म. प्र.) फोन-9752907172

ई मेल – krishiparivartan@gmail.com

 

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