खरीफ फसलों में सामयिक एवं प्रभावी खरपतवार प्रबंधन

By | 2017-06-30

फसलों में खरपतवार जहां फसल प्रतियोगिता करके उपज में 30-80 प्रतिशत तक की भारी कमी कर देतें है वही किसानों को आर्थिक नुकसान भी पहुंचाते है। इसलिए फसलों का भरपूर उत्पादन प्राप्त करने के लिए सामयिक एवं प्रभावी खरपतवार प्रबंधन किया जाना नितान्त आवश्यक है। खरीफ फसलों की उत्पादन क्षमता बढ़ने के लिए सुधरी खेती की सभी प्रायोगिक विधियों को अपनाना आवश्यक है।

खरपतवार प्रबंधन

हमारे देश में खरीफ फसल की खेती मुख्यतया दो परीस्थितियों में की जाती जाती है ।

  1. वर्षा आधारित
  2. सिंचित

ऊँची भूमि में वर्षा आधारित खेती में खरपतवार नियंत्रण एक बड़ी समस्या है, यदि इन पर समय  से नियंत्रण न किया जाय तो फसल पूरी तरह से नष्ट हो जाती है। जहाँ पर सिंचाई की सुविधा उपलब्ध है वहां धान की खेती तथा अन्य क्षेत्रो में दलहन, तिलहन व मक्का आदि की खेती की जाती है। प्रायः इन क्षेत्रो में खरपतवार एक प्रमुख समस्या है।

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खरपतवारों का फसल पर प्रभाव

खरपतवार प्रायः फसल में नमी, पोषक तत्व, सूर्य का प्रकाश, तथा स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करते है, जिससे मुख्य फसल के उत्पादन में कमी आ जाती है। धान की फसल में खरपतवारों से होने वाले नुकसान को 15-80 प्रतिशत तक पहुँच जाता हैं। कभी-कभी यह नुकसान 100 प्रतिशत तक पहुँच जाता है।

मुख्य फसल में पोषक तत्वों की कमी

खरपतवार सीधे बोये गए धान में 20-40 किग्रा. नाइट्रोजन, 5-15किग्रा. फास्फोरस, 15-50 किग्रा. पोटाश तथा रोपाई वाले धान में 4-12 किग्रा. नाइट्रोजन, 1-13 किग्रा. फास्फोरस, 7-14 किग्रा. पोटाश प्रति हैक्टेयर की दर से शोषित कर लेते हैं तथा धान की फसल को पोषक तत्वों से वंचित कर देते है।

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उपज की गुणवत्ता में कमी

पैदावार में कमी के साथ–साथ खरपतवार धान में लगने वाले रोगों के जीवाणुओं एवं कीट व्याधियों को भी आश्रय देते है। कुछ खरपतवार के बीज धान के बीज के साथ मिलकर उसकी गुणवत्ता को ख़राब कर देते है।

धान के खरपतवारों की रोकथाम

फसल में खरपतवार से होने वाले नुकसान खरपतवारों की संख्या, किस्म एवं फसल से प्रतिस्पर्धा के समय पर निर्भर करता है। घास कुल के खरपतवार जैसे सावां, कोदो फसल की प्राम्भिक अवस्था में अधिक नुकसान पहुँचाते है। सीधे बोये गए धान में बुआई के 15-45 दिन तक, रोपाई वाले धान में बुआई के 35-45 दिन बाद का समय खरपतवार प्रर्तिस्पर्धा की दृष्टि से क्रांतिक होता है।  इस अवधि में फसल को खरपतवारों से मुक्त रखना आर्थिक दृष्टि से लाभदायक होता है तथा फसल का उत्पादन अधिक प्रभावित नहीं होता है।

धान की फसल के प्रमुख खरपतवार

धान की फसल  में तीन प्रकार के खरपतवार पाए जाते है।

  1. चौड़ी पत्ती वाले
  2. संकरी पत्ती वाले
  3. मोथा कुल

खरपतवारों की रोकथाम में ध्यान देने वाली बात यह है की खरपतवारों का सही समय पर नियंत्रण किया जाय, चाहे किसी भी तरीके से करें।

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खरपतवारनाशियों का उपयोग

खरपतवार प्रबंधन

खरपतवार प्रतिस्पर्धा की क्रांतिक समय में मजदूरों की उपलब्धता में कमी, बढाती हुए मजदूरी कीमत, खेत में अधिक नमी के कारण यांत्रिक विधि से निराई-गुड़ाई सम्भव नहीं हो पाती है। अतः उपरोक्त परिस्थितियों में खरपतवारों का शाकनाशियों से नियंत्रण करने से प्रति हेक्टेयर लागत कम आती है तथा समय की भरी बचत होती है, लेकिन खरपतवारनाशी रसायनों का प्रयोग करते समय एवं उचित विधि तथा उपयुक्त समय पर प्रयोग का सदैव ध्यान रखना चाहिए अन्यथा लाभ के बजाय हानि की संभावना भी रहती है।

खरपतवारनाशी प्रयोग करने की विधि

खरपतवारनाशी रसायनों की आवश्यक मात्रा को 400-600 लीटर पानी में घोल कर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव धान रोपाई के 2-3 दिन के भीतर 4-5 से.मि. भरे पानी में समान रूप से करना चाहिए।

परीक्षण परिणाम

कृषि विज्ञान केंद्र, आजमगढ़ द्वारा विगत वर्षों (2005-2008) में कृषकों के प्रक्षेत्र पर सहभागिता के साथ किये गए परिणाम यह दर्शाते है की धान उत्पादन की प्रचलित पद्धति रोपाई से उत्पादन अधिक प्राप्त हुआ, परन्तु लाभ का विश्लेषण करने पर धान उगने की अन्य दोनों पद्धतियों की तुलना में काफी कम पाया गया। अतएव उक्त परीक्षणों के आधार पर धान-ढेंचा की सह फसली खेती (ब्राउन मेंयूरिंग) करने से अधिक उपज के साथ खरपतवार पर प्रभावी नियंत्रण करते हुए मृदा उर्वरता को भी बढ़ने में सहायक पाया गया है।

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गन्ना

गन्ना खरीफ मौसम की एक नकदी व लम्बी अवधि वाली फसल है। खरपतवार नियंत्रण हेतु निम्नलिखित में से किसी एक रसायन का प्रयोग किया जा सकता है।

एट्राजीन

गन्ने की फसल में खरपतवार नष्ट करने के लिए एट्राजीन 4.0 किग्रा. प्रति हैक्टेयर का प्रयोग 400-600 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण से पहले करें।

एट्राजीन+2,4-डी

एट्राजीन 2.0 किग्रा. प्रति हैक्टेयर तथा 2,4-डी की 3.0 लीटर प्रति हैक्टेयर दोनों का प्रयोग फसल उगने के 5 सप्ताह बाद करें।

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मेट्रिब्यूजी

मेट्रिब्यूजीन १.५-२.० किग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से 400-600 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण से पूर्व  या अंकुरण के बाद छिड़काव करें। यह खरपतवारनाशी केवल घास कुल के खरपतवार को ही मारती है।

मेट्रिब्यूजिन+2,4-डी

घास कुल व चौड़ी पत्ती वाले के खरपतवारों को नष्ट करने के लिए मेट्रिब्यूजिन 1.5 किग्रा./हैक्टेयर +2,4-डी 3.0 लीटर प्रति हैक्टेयर को आवश्यकतानुसार से 400-600 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण के बाद छिड़काव करें।

मक्का ज्वार बाजरा

इन खरीफ फसलों में खरपतवारों का सफाया करने के लिए निम्नलिखित खरपतवारनाशियों का प्रयोग किया जाता है।

पेण्डीमेथिलीन (30 ई. सी.) + एट्राजीन (50 डब्ल्यू पी.)

एट्राजीन 1.5 किग्रा. + पेण्डीमेथिलीन 2.5 लीटर के मिश्रण को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टेयर की दर से छिड़काव करें। यदि मक्का, ज्वार एवं बाजरे के साथ दलहनी फसल लगी हो तो इस दवा का प्रयोग न करें।

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एलाक्लोर (50 ई. सी.):-

इस शाकनाशी की 4.0-5.0 लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद तथा अंकुरण के पूर्व प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

पेन्डामेथिलीन (30 ई. सी.):-

पेन्डामेथिलीन की 3.0 से 4.5 लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद तथा अंकुरण के पूर्व प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

2, 4- डी (34 ई. सी.):-

किग्रा प्रति 2,4-डी को 400 लीटर पानी में घोल बनाकर अंकुरण के बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों को नष्ट करने के लिए प्रयोग करें।

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सोयाबीन एवं मूँगफली:-

सोयाबीन एवं मूँगफली में खरपतवार नियंत्रण के लिए निम्नलिखित शाकनाशियों में से किसी एक का प्रयोग करें।

फ्लूक्लोरेलिन(45 ई. सी.):-

फ्लूक्लोरेलिन 2.0 लीटर मात्रा लेकर 400 लीटर पानी में घोल बनाकर खेत की अंतिम तैयारी के समय छिड़काव कर भूमि की ऊपरी सतह पर मिला दें।

एलाक्लोर (50 ई. सी.):-

इस शाकनाशी की 3-4 लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के बाद तथा अंकुरण के पूर्व प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

पेन्डामेथिलीन (30 ई. सी.):-

पेन्डामेथिलीन की 2.5 से 3.0 लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर फसल उगने से पहले प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

मुंग, उड़द,अरहर व लोबिया:-

ये खरीफ मौसम की मुख्य खरीफ फसलें हैं। इन फसलों में खरपतवार नियंत्रण के लिए निम्न में से किसी एक रसायन का प्रयोग करें।

पेन्डामेथिलीन (30 ई. सी.):-

पेन्डामेथिलीन की 2.5 से 3.0 लीटर मात्रा 400 लीटर पानी में घोलकर बुवाई के तुरंत बाद या फसल उगने से पहले प्रति हेक्टेयर के हिसाब से छिड़काव करें।

फ्लूक्लोरेलिन(45 ई. सी.):-

फ्लूक्लोरेलिन 2.0 लीटर मात्रा लेकर 400-600 लीटर पानी में घोल बनाकर खेत की अंतिम जुताई के समय छिड़के और मृदा की ऊपरी सतह पर मिला दें।

इमजाथापर ( एस. एल.):-

इस खरपतवारनाशी का प्रयोग खरीफ दलहन की बुवाई के २५ दिन बाद १.० लीटर दवा का ४००-६०० लीटर पानी में घोल बनाकर पर्णीय छिड़काव करना चाहिए।

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परीक्षण परिणाम :-

कृषि विज्ञानं केंद्र, आजमगढ़ द्वारा वर्ष 2013-14 में किए गए प्रक्षेत्र परीक्षण के परिणाम दर्शाते हैं की खरीफ सीजन के खरपतवारों का सामयिक नियंत्रण हो जाने पर फसल और खरपतवारों की पर्तिस्पर्धा समाप्त हो जाती हैं जिसका अनुकूल प्रभाव उपज पर पड़ता हैं। बुवाई के 20-25 दिन बाद इमजाथापर(10 ( एस. एल.) का 100 ग्राम सक्रिय तत्व (1.0ली. घोल) का छिड़काव करने से उपज में 75% की वृद्धि कृषक विधि की तुलना में दर्ज की गई।

भिंडी,टमाटर,बेंगन एवं मिर्च :-

सब्जी वाली फसलों में अधिक उपज प्राप्त करने के लिए खरपतवारों का नियंत्रण बहुत ही आवश्यक हैं। इन फसलों में निम्नलिखित शाकनाशियों में से किसी एक के द्वारा खरपतवारों का सफाया किया जा सकता हैं।

फ्लूक्लोरेलिन(45 ई. सी.):-

फ्लूक्लोरेलिन 1.5 लीटर मात्रा लेकर 400लीटर पानी में घोल कर खेत की अंतिम जुताई के समय छिड़के और मृदा की ऊपरी सतह पर मिला दें। इस रसायन का रोपाई के बाद भी छिड़काव कर सकते हैं।

पेन्डामेथिलीन (30 ई. सी.):-

पेन्डामेथिलीन की 3.3 लीटर मात्रा 400-600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर पौध लगाने से पूर्व छिड़कें।

नोट:- कोई दवा, पाउडर के रूप में हो तो उसकी 1.0 लीटर प्रति हेक्टेयर के स्थान पर 1.0 किग्रा. प्रति हेक्टेयर ले सकते हैं।

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रासायनिक खरपतवार नियंत्रण में बरती जाने वाली सावधानियां:-

  • दवा का प्रयोग करते समय बच्चों को दूर रखें।
  • जहाँ तक संभव हो रसायन का छिड़काव करते समय सुरक्षित कपड़े,जूते,चश्में और मास्क का प्रयोग करें।
  • दवा का छिड़काव करते समय धूम्रपान न करें।
  • तेज हवा तथा हवा के विपरीत दिशा में दवा का छिड़काव न करें।
  • जहाँ तक संभव हो सके दवा का घोल तैयार कर लेने के बाद छिड़काव में विलम्ब न करें।
  • हल्की भूमि में न्यूनतम एवं भारी भूमि में दवा की अधिकतम संस्तुति मात्रा प्रयोग करें।
  • मशीन को प्रयोग करने के बाद तथा पहले अच्छी तरह पानी से साफ कर लें।

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