खरपतवारनाशी का खरीफ फसलो में उपयोग

By | 2017-04-25

खरीफ/वर्षा के मौसम में अनियंत्रित खरपतवार अधिक उत्पादन की मुख्य समस्या हैं। क्योकि इस समय जलवायु खरपतवारोंकी बढ़वार एवं विकास हेतु बहुत ही अनुकूल होती हैं .इस मौसम में खरपतवारों की सघनता रबी एवं जायद मौसम की तुलना में कई गुना ज्यादा होती हैं फलस्वरूप उत्पादन में इतनी गिरावट आती हैं की कभी- कभी तो पूरी फसल ही नष्ट हो जाती हैं। निराई- गुड़ाई अथवा यंत्रो की मदद से हलाकि खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण तो किया जा सकता हैं किन्तु मृदा एवं  जलवायु स्थिति, मजदूरो की उचित समय पर कमी बढ़ती मजदूरी की दरे आदि के कारण खरपतवारों का प्रभावी नियंत्रण कर पाना मुश्किल हो जाता हैं। ऐसी स्थिति में किसानों के पास खरपतवारनाशी का उपयोग ही सर्वोत्तम विकल्प रह जाता हैं।

खरपतवारनाशी

खरपतवारनाशी का उपयोग

खरपतवारनाशी के इस्तेमाल के सम्बन्ध में किसान के मन में अनेक शंकाए रहती हैं, उसमे प्रमुख यह हैं की इनके (खरपतवारनाशी) इस्तेमाल से वर्तमान एवं अनुवर्ती फसलो पर इनका प्रतिकूल प्रभाव पड़ता हैं। यहाँ यह बताना अति आवश्यक हैं की यदि खरपतवारनाशीयों का प्रयोग विशेषज्ञओ अथवा जानकारों की देख रेख एवं निर्देशन में किया जाए तो फसलो पर किसी तरह का प्रतिकूल प्रभाव पड़े बिना खरपतवारो का प्रभावी नियंत्रण किया जा सकता हैं। जो अन्य उपायो की तुलना में काफ़ी किफायती भी रहता हैं। संलग्न तालिका में खरीफ फसलो की अनुशंसित खरपतवारनाशी, उसकी मात्रा, उपयोग समय एवं किस तरह के खरपतवारो पर प्रभावी हैं आदि जानकारी दी जा रही हैं ताकि किसान फसल अनुरूप खरपतवारनाशी का सही उपयोग कर अपनी फसलो को खरपतवारो से मुक्त कर अधिक उत्पदान एवं मुनाफा अर्जित कर सकते हैं।

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फसल

खरपतवारनाशी खरपतवारनाशी(मात्रा ग्राम/है. सक्रीय तत्व के) रूप में बाजार उत्पादन की मात्रा (ग्राम अथवा मिली./हेक्टेयर) उपयोग समय

विशेष विवरण 

1.       मक्का एट्राजीन 500-750 1000- 1500 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व  चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
  पेन्डीमिथालिन 750- 1000 2500- 3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व अंत सस्य हेतु विशेष उपयुक्त
घास कुल की खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
एट्राजीन +एलाक्लोर 500- 1500 1000- 3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व चौड़ी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।

2.ज्वार

एट्राजीन 500 1000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
पेन्डीमिथालिन 750-1000 2500-3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी दलहनी अन्तः सस्य हेतु उपयुक्त ।
3.   धान पेन्डीमिथालिन 750 2500 बुवाई के बाद सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
2,4- डी 500-750 1500-2250 रोपाई/बुवाई के 20-25 दिन बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
फेनोक्साप्रोप इथाइल 60-80 600-800 रोपाई/बुवाई के 20-25 दिन बाद सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
पाइराजोसल्फ्युरोन 25 250 रोपाई के 7 दिन बाद चौड़ी पत्ती एवं मोथा वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
बिसपाइरिबेक सोडियम 25 250 रोपाई 15-20 दिन बाद चौड़ी एवं सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर एवं मोथा कुल की खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
ओक्जाडायरजील 90 1500 बुवाई के बाद सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
4.   बाजरा एट्राजीन 250-500 500-1000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
5.   फलीदार फसले(उडद, मुंग, अरहर, ग्वार आदि) एलाक्लोर 2000 4000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
पेन्डीमिथालिन 750 2500 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
क्यूजालोफॉस इथाइल 40-50 800-1000 बुवाई के 15-20बाद सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
इमेजाथाईपर 80-100 800-1000 बुवाई के 15-20बाद अधिकांश खरपतवारों पर प्रभावी।

6.   मुगफली

इमेजाथाईपर 100 1000 बुवाई के 15-20बाद अधिकांश खरपतवारों पर प्रभावी।
पेन्डीमिथालिन 750-1000 2500-3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
7.   सोयाबीन क्लोरीम्यूरॉन इथाइल 6-9 30-40 बुवाई के 15-20बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
फेनोक्साप्रोप इथाइल 80-100 800-1000   घास कुल की खरपतवारों पर  प्रभावी।
इमेजाथाईपर 100 1000 बुवाई के 15-20बाद सभी तरह के खरपतवारों पर प्रभावी।
मेट्रीब्यूजिन 350 500 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व घास कुल एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
क्यूजालोफॉस इथाइल 40-50 800-1000 बुवाई के 15-20बाद घास कुल की खरपतवारों विषेश रूप से सामा घास पर प्रभावी  पर  प्रभावी।
पेन्डीमिथालिन 750-1000 2500-3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व घास कुल की खरपतवारों पर  प्रभावी।
8.     तिल पेन्डीमिथालिन 750 2500 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व घास कुल की खरपतवारों पर  प्रभावी।
9.   कपास डाइयुरोन 500-750 600-900 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व घास कुल एवं चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
पाइरीथायोबेक सोडियम 75 750 बुवाई के 25बाद चौड़ी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।
पेन्डीमिथालिन 750-1000 2500-3000 बुवाई के बाद किन्तु अंकुरण पूर्व सकरी पत्ती वाले खरपतवारों पर ज्यादा प्रभावी।

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खरपतवारनाशी के व्यावसायिक उत्पाद की मात्रा

एक ही खरपतवारनाशी बाजार में अनेको व्यापारिक नाम से मिलता हैं एवं कृषि से सम्बंधित पत्र- पत्रिकाओं में प्रायः व्यापारिक नाम को अनुशंसित नहीं किया जाता हैं क्योंकि ऐसा करना किसी कंपनी विशेष के झुकाव को प्रदर्शित करता हैं ,व्यापारिक नाम के बजाए खरपतवारनाशी का साधारण नाम एवं उसकी अनुशंसित मात्रा को लिखा जाता हैं जो अपने आप में 100% सक्रीय तत्व के बराबर हैं। किसानों को व्यापारिक/उत्पादों की कितनी मात्रा की जरूरत पड़ेगी इस हेतु दिए गए सूत्र की मदद से इसकी मात्रा ज्ञात की जा सकती हैं।

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व्यावसायिक उत्पाद (ग्राम/हेक्टेयर)

अथवा मिलीलीटर/हेक्टेयर       =

खरपतवारनाशी की अनुशंसित मात्रा (ग्राम/हेक्टेयर) X100
खरपतवारनाशी में सक्रीय तत्व (%)

खरपतवारनाशी के उपयोग में सम्बंधित सावधानियाँ

इनके (खरपतवारनाशी) को वैज्ञानिक अथवा जानकार के निर्देशन में ही उपयोग करें।

उत्पाद के डिब्बे/पैकेट पर लिखे गए निर्देश पढ़े एवं उसी के अनुसार पालन करें।

किसी भी शंका का छिड़काव पूर्व निवारण करें।

छिड़काव करने से पूर्व प्रयुक्त मशीन का अंशाकन कर प्रति इकाई क्षेत्र हेतु पानी की सही मात्रा को ज्ञात करें।

वांछित क्षेत्र की व्यापारिक मात्रा ज्ञात कर  खरपतवारनाशी का संचय घोल तैयार कर छिड़काव करें ताकि इकाई क्षेत्र में खरपतवारनाशी की अनुशंसित मात्रा का प्रयोग हो सकें।

मृदा का उपयोग किये जाने वाले खरपतवारनाशी के अच्छे परिणाम प्राप्त करने हेतु उपयोग करते समय मृदा सतह पर अच्छी नमी होना आवशयक हैं ताकि मृदा में मौजूद खरपतवार बीजों में खरपतवारनाशी का ढंग से अवशोषण हो सकें। इसी पश्चात उपयोग किये जाने वाले खरपतवारनाशी के प्रभावी परिणाम हेतु वायुमंडल में अच्छी आद्रता तथा मृदा में पर्याप्त नमी का होना आवश्यक हैं।

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उपयुक्त बातों को ध्यान में रखकर खरीफ फसलों में खरपतवारनाशियों का प्रयोग किया जाए तो लाभ लागत अनुपात  को अधिक उत्पादन एवं कम कृषि लागत द्वारा बढ़ाया जा सकता हैं जो की आज के किसान भइयों की आवशयकता हैं।

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