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खजूर फल-पोषक सरंचना एवं औषधीय गुण

खजूर
Written by bheru lal gaderi

खजूर विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। सदियों से यह मध्यपूर्व एशिया उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानी इलाकों का प्रमुख भोजन बना हुआ है। अरब देशों में पैदा होने वाला स्वादिष्ट खजूर एक पौष्टिक मेवा है जो सेहत की दृष्टि से बहुत गुणकारी है। खजूर प्रकृति का अनुपम उपहार अपने स्वाद और औषधीय गुणों के लिए लोकप्रिय फल है। पवित्र कुरान के अनुसार खजूर पवित्र फलों में से एक है।मुस्लिम भाई-बहन अपना रोजा खजूर खाकर ही तोड़ते है क्योंकि इसे खाकर ऊर्जा आती है। इस्लामी चिकित्सा ने इसको शांति प्रदान करने वाला, पेट साफ करने वाला और ह्रदय को गति प्रदान करने वाला बताया है जो मुष्य को भूलने की बीमारी से ग्रस्त होने से रोकता है। खजूर के पेड़ को विश्व में सबसे सुंदर सजावटी पेड़ो में से एक माना जाता है।

खजूर

खजूर फल दो प्रकार के होतें है

  • खजूर २. पिण्ड खजूर

पिण्ड खजूर का फल खजूर के फल से अधिक गूदेदार व काफी बड़ा होता हैं यही फल सूखने पर छुहारा कहलाता हैं।  इसका रंग काला या लाल होता हैं, स्वाद मीठा और वकास होता हैं एवं प्रकृति शीतल और ठंडा होता हैं। इसके पेड़ के ताजे रस को नीरा और बासी को ताड़ी कहते हैं।

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  पोषक सरंचना

(100 ग्राम)- ऊर्जा 289 कैलोरी, कार्बोहाइट्रेट 75 ग्राम, शर्करा 63 ग्राम, फाइबर 8 ग्राम, वसा 0.4 ग्राम, प्रोटीन 2.5 ग्राम, पानी 20.5 ग्राम, विटामिन-ए 10 आई. यु. , विटामिन बी 1, बी 2, बी 3, बी 5, बी 6, बी 9 क्रमशः 5, 6, 8, 12, 13 एवं 9%, विटामिन के 3% खनिज (%) कैल्शियम 4, लोह 8, मैग्नीशियम 12, %, फास्फोरस 9, पोटेशियम 14, सोडियम 2 और  जिंक 3% पाया गया हैं।

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खजूर के औषधीय गुण

  • यह स्वादिष्ट, पौष्टिक, मीठा, शीतल, तृप्तिकारक( इच्छा को शांत करने वाला), स्निग्ध, वात, पित्त और कफ को दूर करने वाला होता हैं।
  • यह टी. बी., रक्त पित्त, सूजन एवं फेफड़ो की सूजन के लिए लाभकारी होता हैं एवं यह शरीर एवं नाड़ी को शक्तिशाली बनाता हैं।
  • इसे सर दर्द, बेहोशी, कमजोरी, भ्रम, पेट दर्द, शराब के दोषो को दूर करता हैं तथा यह दमा, खासी, बुखार, मूत्र रोग के लिए लाभकारी हैं।
  • इसको रात भर पानी में भिगोकर सुबह लेना लाभदायक रहता हैं या फिर इसे दूध में उबाल कर लिया जा सकता हैं।कमजोर हृदय वाले के लिए विशेष उपयोगी हैं।

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  • खजूर प्रोस्टेट ग्लैंड के विकारो में लाभकारी सिद्ध हुआ हैं। निम्न रक्त चाप रोगियों के लिए इसका सेवन इसे नियंत्रित करता हैं।
  • इसका सेवन बालो को लम्बा, घना और मुलायम बनता हैं।
  • यह मधुर, शीतल, पौष्टिक व सेवन करने के बाद तुरंत शक्ति स्फूर्ति देने वाला हैं। क्योंकि इसके सेवन से ग्लूकोज और फ्रुक्टोज के रूप में नैसर्गिक शक़्कर हमारे शरीर को मिलती हैं।
  • यह रक्त, मांस व् वीर्य की वृद्धि करता हैं।
  • यह रेचक गुण से भरपूर होने के कारण कब्ज नाशक हैं।
  • गर्भावस्था में इसे खाने से हीमोग्लोबिन बढ़ाता हैं तथा गर्भवती महिलाओ में दूध की मात्रा में वृद्धि होती हैं क्योंकि इसमें आयरन, कैल्शियम, मैग्नीशियम, फास्फोरस और सेलिनियम होता हैं।
  • दांत का दर्द और उसकी सड़न को दूर करता हैं क्योंकि इसमें फ़्लोरिन मिनरल होता हैं।
  • दूध में इसका नियमित सेवन बलवर्धक होकर चमत्कारिक असर दिखता हैं जो की काम शक्ति में वृद्धि करता हैं।
  • निम्बू के रस में इसकी चटनी बना कर खाने से भोजन के प्रति अरुचि मिटती हैं। शहद के साथ खजूर के चूर्ण का ३ बार सेवन रक्त पित्त की अवस्था में लाभदायक होता हैं, अतिसार रोग में दही के साथ खजूर के चूर्ण का उपयोग लाभदायक होता हैं।

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