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क्यू.पी.एम. मक्का आधारित किण्वित खाद्य पदार्थ

क्यू.पी.एम. मक्का आधारित किण्वित खाद्य पदार्थ
Written by bheru lal gaderi

मक्का का वानस्पतिक नाम जिया मेज है यही एक प्रमुख खाद्य फसल है, जो मोटे अनाजों की श्रेणी में आता है। भारत में मक्का की खेती व्यापक रूप से आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक, राजस्थान, उत्तर प्रदेश इत्यादि राज्यों में की जाती है। इनमें से राजस्थान में मक्का का सर्वाधिक क्षेत्रफल है व आंध्रा में सर्वाधिक उत्पादन होता है। कुल मक्का का उत्पादन का 80% से अधिक आंध्र प्रदेश(20.9%), कर्नाटक(16.5%),  राजस्थान (9.9%), महाराष्ट्र(9.1%),  बिहार (8.9%),  उत्तर प्रदेश(6.1%),  हिमाचल प्रदेश(4.4%)  इत्यादि राज्यों में होता है, क्यू.पी.एम. मक्का खरीफ ऋतु की फसल है परंतु जहां सिंचाई के साधन है वहां रबी और खरीफ की अगेती फसल के रूप में खेती की जा सकती है ,ध्यान देने वाली बात यह है कि हमारे राज्य में मक्का का उत्पादन सर्वाधिक क्षेत्र में होता है ,अधिकतर इस  फसल को उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, भीलवाड़ा तथा चित्तौड़गढ़ में उगाया जाता है। मक्का की खपत विश्व भर में अलग-अलग कार्यो के लिए की जाती है, जिसमें से 60 प्रतिशत आहार, 28 प्रतिशत खाने के लिए, 22 प्रतिशत इंडस्ट्रियल उपयोग के लिए जैसे कि स्टार्च कॉर्न फ्लॉवर इत्यादि सम्मिलित किए गए हैं।

क्यू.पी.एम. मक्का आधारित किण्वित खाद्य पदार्थ

मक्का कार्बोहाइड्रेट का एक बहुत अच्छा स्त्रोत है व मनुष्य के साथ-साथ पशुओं के आहार का प्रमुख अवयव भी है तथा औद्योगिक दृष्टिकोण से भी मक्का की खेती का महत्वपूर्ण स्थान है। मनुष्य के पोषण स्तर को निर्धारित करने का एक महत्वपूर्ण फसल है। भारत में गेहूं व चावल के पश्चात मक्का  एक प्रमुख अनाज है। मक्का की कुल उपज का लगभग 28 प्रतिशत ही आहार के रूप में प्रयुक्त होता है जो कि मक्का के उत्तम पोषण प्रदान करने की क्षमता एवं गुणवत्ता की दृष्टि से काफी कम है। मक्का की विभिन्न प्रजातियां विकसित की जा चुकी है जिनमें गुणवत्ता प्रोटीन युक्त मक्का पौष्टिकता की दृष्टि से अग्रणी है। उच्च गुणवत्ता प्रोटीन मक्का में दो महत्वपूर्ण अमीनो अम्ल एवं ट्रिप्टोफेन उचित मात्रा में पाए जाते हैं, जो की शारीरिक विकास के लिए अत्यंत आवश्यक है। अपनी उच्चतम जैविक गुणवत्ता के कारण क्यू.पी.एम. मक्का के प्रोटीन का अवशोषण मनुष्य के शरीर में अधिक होता है।

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गुणवत्ता प्रोटीन युक्त (क्यू.पी.एम. मक्का)                          

मक्का आधारित खाद्य उत्पाद बाजार में न केवल उत्पादन और खपत श्रृंखला प्रबंधन के लिए बल्कि बाजार में बीज उत्पादकों हिस्सेदारी रखने वाले व्यक्तियों जैसे  कृषको, उद्यमियों एवं उपभोक्ताओं के लिए भारी लाभ अर्जित करने में मददगार साबित हो सकते हैं।

मक्का प्रसंस्करण एवं मूल्य संवर्धन

यह परियोजना गत 3 वर्षों से डेयरी एवं खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में चल रही है। यह परियोजना न्यूट्री फार्म पायलट स्कीम (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना) द्वारा दिया गया है। इस परियोजना के अंतर्गत मक्का के भिन्न-भिन्न उत्पाद बनाते हैं तथा लोगों को बनाना सिखाते हैं। उदयपुर के आस-पास के किसानों तथा महिलाओं को समय रहते प्रशिक्षण दिया जाता है तथा क्यू.पी.एम. मक्का के बारे में भली प्रकार से अवगत करवाया जाता है। इस प्रशिक्षण के आधार पर लोग अपना लघु उद्योग खोलकर अत्यधिक लाभ कमा सकते हैं। कई लोग इससे लाभांवित हुए हैं तथा एक छोटे से स्तर पर अपना उद्योग आरंभ करने का भरपूर प्रयास कर रहे हैं।

इस परियोजना के चलते लगभग 1500 लोगों को मुफ्त प्रशिक्षण दिया गया है तथा इसमें प्रशिक्षण प्रमाण पत्र दिए गए हैं, जिसके आधार पर वह लोग भविष्य में अपना लाभ लघु उद्योग प्रारंभ करने के लिए कर सकते हैं। कई मेलों में भी इस परियोजना ने अपनी तकनीकों तथा उत्पादों का प्रदर्शन किया है ताकि लोगों के बीच में क्यू.पी.एम. मक्का के बारे में जागरूकता बढ़े। सभी लोगों ने क्यू.पी.एम. मक्का से बने उत्पादों को सराहा है। विशेषतौर पर महानिदेशक, आईसीएआर, राधा मोहन सिंह जी, कृषि मंत्री, भारत सरकार, कल्याण सिंह जी, राज्यपाल राजस्थान आदि ने क्यू.पी.एम. मक्का. उत्पादों को तथा तथा लघु उद्योग लगाने तथा बाजार में जल्द से जल्द लाने के लिए किसानों को प्रेरित किया है।

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मक्का के विभिन्न प्रकार के उत्पादों

डेयरी एवं खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय में स्थापित सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने मक्का के विभिन्न प्रकार के उत्पादों जैसे फाइबर युक्त आटा, दलिया, मक्का के आटे से बने सम्मिलित उत्पाद जैसे बेकरी उत्पाद (नॉन खटाई, सॉल्टेड, बिस्कुट, खोपरा कुकीज, केक, मफिंस, ब्रेड, हॉट डॉग आदी) पासतीन, पारंपरिक उत्पाद (करबा, राबोडी, सकरपारा आदि) को विकसित एवं मानवीकरण किया गया है। इस आलेख के अंतर्गत किण्वित प्रक्रिया से उत्पन्न पदार्थ जैसे कि खमण व अप्पे  के बारे में भली प्रकार से अध्ययन करेंगे।

क्यू.पी.एम. मक्का से खमण बनाना

खमण ढोकला गुजरात का बहुत ही विख्यात नाश्ता है, यह प्रायः बेसन से बनाया जाता हे। बेसन चने की दाल से बनता है, और चने की दाल में गर्माहट होती है, इस वजह से बेसन का अतिरिक्त उपयोग शरीर की गर्मी को बढ़ा देता है और इससे स्क्रीन लाल पड़ जाती है। बेसन के अधिक उपयोग से दस्त, पेट में गैस बनने की समस्या हो सकती है तथा एसिडिटी भी हो सकती है। उपरोक्त सभी समस्याओं को मद्दे नजर रखते हुए हमने खमण बनाने के लिए क्यू.पी.एम. मक्का आटे का इस्तेमाल किया। खमण ढोकला की इस आसान रेसिपी के द्वारा आप कम समय में मुलायम और स्पंजी गुजराती ढोकला तैयार कर सकते हैं। खमण खाने में बड़ा ही स्वादिष्ट होता है, इसी बात में पकाने के कारण तेल तो बहुत ही कम प्रयोग होता है, यदि आप तेल से बनी चीजों से परहेज करते हैं तो इसे अवश्य बनाइए।

क्यू.पी.एम. मक्का का आटा, दही और 3/4 कप पानी में मिलाकर गहरे कटोरे में मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स करें। इसे ढक्कन के साथ कवर करें और 30 मिनट के लिए अलग रखें। अदरक, हरी मिर्च पेस्ट, हल्दी पाउडर, चीनी, नींबू का रस, नमक अच्छी तरह मिलाएं। भाप में रखने से पहले इसमें सोडा मिला लें तथा 15 मिनट बाद ले इसे ठंडा कर के वर्गाकार में काट लें। अभी छोटे से बर्तन में तेल गरम करके सरसों के बीज, तिल तथा मीठे नीम के पत्ते डालें तथा नींबू व चीनी का गोल मिला लें। इस गोल को भापित वर्गाकार टुकड़ों पर फैला कर ऊपर से बारीक कटे धनिया छिड़क दें।

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क्यू.पी.एम. मक्का से अप्पे बनाना

किण्वित पदार्थों की इस श्रंखला में हम ने क्यू.पी.एम. मक्का के आटे से अप्पे भी बनाया, जो कि दक्षिण भारत के प्रमुख पदार्थों में से एक हैं। दक्षिण भारत में अप्पे चावल, सूजी, उड़द दाल आदि से बनाई जाती है। अप्पे दक्षिण भारत का एक स्वादिष्ट व्यंजन है जो पूरे भारत में बहुत ही लोकप्रिय है। यह स्वाद में बहुत ही उम्दा होता है और इसे किसी भी त्योहार या विशेष अवसर पर परोस सकते हैं। लज्जतदार अप्पे के हर एक बाइट में आपको एक अनूठा अनुभव मिलेगा जिसकी तुलना आप दूसरे किसी अन्य खाद्य उत्पाद से नहीं कर सकते हैं।

अप्पे का स्वाद जितना बढ़िया होता है इससे बनाना उतना ही सरल होता है, इसकी तैयारी में केवल 5 मिनट का समय लगता है और पकने में केवल 10 मिनट का समय लगता है। क्यू.पी.एम. आटे को दही और पानी के साथ मिला लें तथा 10 मिनट के लिए रख दें। अब इसमें बारीक कटी सब्जियां जैसे प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, हरा धनिया मिला दे साथ ही नमक, हल्दी तथा सोडा नमक अच्छी तरह से मिलाकर रख दे अब इसे अप्पे वाले पैन में तेल लगाकर पकने के लिए रख दें। फिर पलट कर  5 मिनट का ले। स्वादिष्ट गरमा-गरम अप्पे को हरी चटनी के साथ परोसे।

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क्यू.पी.एम. मक्का से लाभ

  • उपरोक्त क्यू.पी.एम. मक्का से बनी किण्वित खाद्य पदार्थों की रेसिपी से प्राप्त खमण तथा अप्पे की सहायता से हमारे भारत वर्ष के किसान भाई अपने मक्का का अत्यधिक लाभ कमा सकते हैं। जहां उनको मक्का के व्यापार से केवल 20% मुनाफा होता है वहीं वे लोग यह किण्वित पदार्थ का प्रशिक्षण ले कर 120% लाभ आसानी से कमा सकते हैं। इन पदार्थों को कुछ मिनटों में बहुत आसानी से कहीं भी बनाया और बेचा जा सकता है।
  • उपरोक्त किण्वित पदार्थों के इंस्टेंट मिक्स भी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ऑन मैज परियोजना के अंतर्गत बनाई गई है। जिसकी सहायता से कहीं भी बड़ी आसानी से मिक्स में गुनगुना पानी मिलाकर खमण तथा अप्पे बनाए जा सकते हैं।
  • इन पदार्थों के आधार पर किसान अपना खुद का छोटा-मोटा रेस्टोरेंट भी खोल सकते हैं तथा अपने परिवार का पेट पाल सकते हैं। इस योजना का उद्देश्य क्यू.पी.एम. मक्का से अधिक से अधिक पदार्थ बनाकर व्यावसायिक स्तर पर लाभ कमाना है।

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Author :- 

डॉ. एल. के. मोर्डिया (9460082861)

अधिष्ठाता, डेयरी एवं खाद्य विज्ञान प्रौद्योगिकी महाविद्यालय

महाराणा प्रताप कृषि प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, उदयपुर

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