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कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग से किसानों को मिलेगा उपज का सही दाम

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग
Written by bheru lal gaderi

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग- किसानों की आय बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार की योजनाएं चला रही हैं इसी क्रम में 22 मई को नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में मॉडल संविदा खेती और सेवाएं अधिनियम 2018 को लागू करने के लिए कृषि मंत्रियों ने बैठक की।  इसमें संविदा खेती (CF) की पद्धति को लेकर चर्चा की गई। किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए सरकार ने एक और कानूनी सुधार की ओर कदम बढ़ाया है। कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (ठेके पर खेती कानून) के मॉडल कानून को सरकार ने हरी झंडी दे दी हैं।

कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग

Image Credit – www.brown-co.com

किसानों को उनकी उपज का सही दाम दिलाने के लिए एक प्रारूप तैयार किया गया है। यह प्रारूप न केवल कृषि फसलों के लिए तैयार किया गया है बल्कि पशुपालन, डेयरी और पोल्ट्री उत्पादों के क्षेत्र में इसका इस्तेमाल हो सकेगा।

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केंद्रीय कृषि मंत्री राधामोहन सिंह ने बताया कि कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (ठेका खेती) के उत्पाद एवं आयोजकों के हितों की रक्षा करने के लिए कृषि मंत्रालय ने आदर्श ए.पी.एम.सी. अधिनियम 2003 का प्रारूप तैयार किया है। जिसमें प्रायोजकों के पंजीकरण अनुबंध को रिकॉर्डिंग, विवाद निपटान तंत्र के लिए प्रावधान किए गए हैं। कृषि मंत्री ने बताया कि किसानों को खेती बाड़ी में कमाई बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार ने कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) का एक और मॉडल कानून मसौदा जारी किया है।

क्या है कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती):-

कई बार देखा गया कि खरीदार ना मिलने पर किसानों की फसल बर्बाद हो जाती है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह होती हैं, किसान और बाजार के बीच तालमेल की कमी। ऐसे में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग (अनुबंध खेती) की जरूरत महसूस की गई, ताकि किसानों को भी उनके उत्पाद की कीमत मिल सके। सरकार ने केंद्रीय कृषि में कॉन्ट्रैक्ट फार्मिंग के क्षेत्र में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देने का ऐलान किया था। कृषि में निजी क्षेत्र में पूंजी निवेश को बढ़ावा देना भी ठेका खेती (अनुबंध खेती) का उद्देश्य है।

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खेती का बीमा होगा:-

कृषि उपज समिति अधिनियम से इसे पूरी तरह से अलग रखा गया है। विवाद निपटाने के लिए व्यवस्थाएं होगी और खेती का बीमा भी होगा।

किसानों के हितों की रक्षा के लिए अनुबंध के आस-पास की मंडियों के मॉडल भाव से 10 फीसदी अधिक भाव पर अनुबंध होगा। संबंधित व्यापार आसपास की मंडियों में नहीं होता है तो फिर होलसेल की मंडियों में 7 दिन के भाव के आधार पर औसत कीमत तय की जाएगी तथा उस पर 10 फीसदी और जोड़कर ही कंपनी किसान से अनुबंध कर सकेगी।

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