यंत्रीकरण आधुनिक कृषि में यंत्रों का चुनाव एवं उपयोग

By | 2017-05-05

भारतीय अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण योगदान हैं, जो की सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 25% हैं। आधुनिक समय में कृषि कार्य को समय पर पूर्ण करने तथा कम क्षेत्र में अधिक उत्पादन प्राप्त करने हेतु कृषि का यंत्रीकरण अत्यंत आवश्यक हैं। विज्ञानं एवं प्रद्योगिकी के सिद्धांतों का कृषि के क्षेत्र में मानव श्रम को कम करने तथा उत्पादन बढ़ाने हेतु प्रयोग करना ही कृषि यंत्रीकरण हैं। इसके अंतर्गत कृषि विकास, उत्पादन हेतु सभी मशीनों का प्रयोग तथा प्रबंधन, जल नियंत्रण, खाद्य भण्डारण तथा प्रसंस्करण आदि आता हैं।

यंत्रीकरण

कृषि यंत्रीकरण की आवश्यकता

कृषि यंत्रीकरण का अर्थ केवल बड़ी मशीनों अथवा ट्रेक्टर का खेतों में प्रयोग करना ही नहीं हैं, अपितु आवश्यकता के अनुरूप विभिन्न कृषि कार्यों को करने हेतु निश्चित समय अंतराल प्रदान करना, उपलब्ध ऊर्जा के स्त्रोतों एवं आधुनिक यंत्रों का प्रयोग कर अधिकतम उत्पादन प्राप्त करना हैं।

आज अन्य औद्योगिक क्षेत्रों की तुलना में कृषि कार्यों के लिए मानव श्रम की उपलब्धता कम होती जा रही हैं, जिसका प्रमुख कारण विभिन्न योजनाओ के अंतर्गत काम करने हेतु कृषि मजदूरों का गांव छोड़कर शहरों की और पलायन करना हैं, क्योंकि वहाँ कृषि की तुलना में कम श्रम में अधिक वेतन और कार्य करने की सुविधा प्राप्त होती हैं। मजदूरों की इसी कमी को कृषि यंत्रों का प्रयोग कर पूरा किया जा सकता हैं।

यंत्रीकरण के प्रमुख लाभ

  • कृषि में मजदूर की कमी को पूरा किया जा सकता हैं।
  • समय पर सारे कृषि कार्य किये जा सकते हैं।
  • एक वर्ष में एक खेत में तीन फसल ली जा सकती हैं।
  • कटाई के समय फसल के दाने में होने वाले नुकसान को कम किया जा सकता हैं।
  • कम श्रम तथा कम लागत में अधिक उत्पादन प्राप्त किया जा सकता हैं।
  • भूमि का सघन उपयोग होगा जिससे कृषि मजदूरों को गांव में ही अधिक कार्य के अवसर मिल सकते हैं।

यह बिलकुल सत्य हैं की भारत में किसानो की प्रति व्यक्ति वार्षिक आय बहुत कम हैं जिसका प्रमुख कारण प्रति हेक्टेयर कम उत्पादन हैं। कृषि यंत्रीकरण को निम्न प्रकार से अपनाकर प्रति हेक्टेयर उत्पादन को बढ़ा सकते हैं :

  • छोटे आकर के खेतों में मानव चलित या पशु चलित यंत्र जैसे खुरपी, फावड़ा, हो, हल बखर, पटेल, त्रिफाली आदि का उपयोग करना।
  • मध्यम आकर के खेतों में छोटे ट्रेक्टर, ट्रेक्टर चलित यंत्र तथा पावर टिलर का मानव चलित तथा पशु चलित यंत्रों के स्थानों में उपयोग करना।
  • बढ़े आकर के खेतों में बढ़ी मशीनों तथा ट्रेक्टर चलित यंत्रों जैसे तवेदार तथा मिटटी पलटने वाले हल, हेरो, सीड-ड्रीम, कम्बाइन हार्वेस्टर आदि का उपयोग करना।

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यंत्रीकरण की सीमाएं

ऐसे देशों में जहाँ खेती के लिए पर्याप्त जमीन तो हैं पर जनसँख्या कम हैं वहाँ यंत्रीकरण के बिना कृषि उत्पादन संभव नहीं हैं। परन्तु हमारे देश में यंत्रीकरण उन्ही क्रियाओ तक सिम्मित हैं जो सरल यंत्रों द्वारा आसानी से की जा सकती हैं और जिनके लिए निश्चित समय पर मानव और पशु श्रम श्रेष्ठ मात्रा में उपलब्ध नहीं हैं। कुछ प्रमुख कारण से यह संभव नहीं हो रहा हैं जिनके प्रमुख कारण निम्न हैं :-

  • अधिक जनसंख्या और कृषि योग्य क्षेत्र का सिमित होना।
  • किसानों के पास पूंजी का अभाव होना।
  • खेतों का आकर छोटा होना जिसके कारण सभी यंत्रों का उपयोग संभव नहीं हैं।
  • गांव में पर्याप्त मात्रा में मानव और पशु श्रम की उपलब्धता।
  • अच्छी सड़को का अभाव और धीमी गति से तकनिकी विकास।
  • सुदूर क्षेत्रों में कार्य करने हेतु प्रशिक्षित तकनीकी कर्मचारियों और अतिरिक्त पुर्जों का अभाव।

कैसे करे कृषि यंत्रों का चुनाव

किसी भी यंत्र को खरीदने से पहले यह आवश्यक हैं की हम अपने आसपास के क्षेत्र का पूरा सर्वेक्षण कर ले। इस सर्वेक्षण से यंत्रों के बारे में पर्याप्त जानकारी प्राप्त करने के बाद जो यंत्र खरीदेंगे, वह खूब अच्छी तरह हमारे काम आएगा। यंत्र के चुनाव में उपलब्ध शक्ति साधन और पूंजी की मुख्य भूमिका हैं। प्रत्येक कृषि यंत्र में निम्नलिखित विशेषताए होनी चहिए।

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शक्ति साधन के अनुरूप

कृषि कार्यों के लिए यदि कोई शक्ति साधन उपलब्ध हैं तो कृषि साधन को हमेशा उसके अनुरूप ही ख़रीदे। ऐसे कृषि यंत्र जिनके लिए नए शक्ति साधन की आवश्यकता पड़े, वे अक्सर महंगे पड़ते हैं।

लागत में कमी

उस कृषि यंत्र का चुनाव सदैव करें जिसके प्रयोग में कृषि कार्यों की लागत में कमी आये और कृषि उत्पादन बढ़ाया जा सकें। यदि कृषि उत्पादन भी नहीं बढ़ता और खर्च भी ज्यों का त्यों रहता हैं तो ऐसे यंत्र को नहीं ख़रीदे।

कार्य कुशलता

नए कृषि यंत्र के उपयोग से अधिक कार्य कम समय में होना चाहिएं। इसके साथ ही वह यंत्र उपलब्ध शक्ति साधन का पूरी तरह से उपयोग कर सकें।

प्रचालन सुख

किसी भी नए कृषि यंत्र को तभी ख़रीदे जब उसके चलाने से कोई कार्य ज्यादा सुखपूर्वक किया जा सकें। नए यंत्र के उपयोग से मानव श्रम में कटौती होनी चाहिएं।

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सुरक्षा साधन

प्रत्येक कृषि यंत्र सुरक्षा के के सम्पूर्ण साधनों से युक्त होना चाहियें जिससे उसके प्रयोग से कार्य करने वाले व्यक्तियों को किसी प्रकार की हानि न हो सकें। तेज गति से चलने वाले पुर्जों के ऊपर सुरक्षात्मक जालियां लगी होनी चाहियें। यंत्र के किनारे भी नुकीले नहीं होने चाहियें अन्यथा उनसे चोट लगने का डर रहता हैं।

विश्वसनीय निर्माण

यंत्र के निर्माण में अच्छी निर्माण सामग्री तथा प्रक्रिया का प्रयोग हो तो उसका उपयोग सहज रहता हैं। ऐसा यंत्र ज्यादा समय तक चलता हैं और उसके अतिरिक्त पुर्जे भी आसानी से प्राप्त हो सकते हैं।

मरम्मत सेवा

उसी यंत्र को खरीदना हैं जिसकी आसानी से देखभाल एवं मरम्मत की सुविधा उपलब्ध हों। आवश्यकता पड़ने पर उसकी मरम्मत के लिए अधिक दूर न जाना पड़े।

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पुर्जो की अदल- बदल

यदि नए कृषि यंत्र के पुर्जों को पहले से ही लिए गए यंत्रों के साथ बदलाव संभव हो तो ऐसा यंत्र खरीदना अधिक लाभप्रद रहता हैं। इससे मरम्मत के लिए रखे जाने वाले पुर्जों के खर्च में भी कमी होती हैं तथा कम पुर्जों को रखने की आवश्यकता पड़ती हैं।

गुणवत्ता

कृषि यंत्रों पर गुणवत्ता चिन्ह अंकित हो उनके अन्य यंत्रों से अच्छा होने की गारंटी रहती हैं। उनमे निर्माण दोष निकल आने पर उन्हें आसानी से बदला जा सकता हैं।

बहुउद्देशीय

यदि एक यंत्र से कई कार्य करने संभव हो तो ऐसे यंत्र को खरीदने में फायदा ही फायदा हैं। कई कार्यों में साधारण हेर- फेर से उसे अन्य कार्यो के लिए उपयोग किया जा सकता हैं। अतः इस बात का यंत्र खरीदने से पहले पता कर लें।

अतिरिक्त पुर्जे

प्रत्येक कृषि यंत्र की सामयिक देख- रेख के लिए कुछ अतिरिक्त पुर्जों की आवश्यकता पड़ती हैं। कई बार यंत्र निर्माता कुछ अतिरिक्त पुर्जे भी नए यंत्र के साथ ही देते हैं पर बाद में उन्हें खरीदना पड़ता हैं। अतः नया यंत्र खरीदते समय उसके अतिरिक्त पुर्जों की उपलब्धि और उनकी कीमतों का भी मिलान कर लेना चाहियें।

परिवहन व्यवस्था

कृषि यंत्रों को अक्सर एक स्थान से दूसरे स्थान पर ले जाना पड़ता हैं, अतः कृषि यंत्रों की समुचित परिवहन व्यवस्था आवश्यक हैं। विशेष रूप से ट्रेक्टर से चलने वाले कृषि यंत्र जिन्हे ट्रेक्टर की लिफ्ट से उढ़ाकर ले जाना संभव हो अन्यथा उसमे अतिरिक्त पहिये लगे हों जिससे यंत्र को खींचने में सुविधा रहें। कुछ अन्य यंत्र जैसे तवेदार हेरा इत्यादि के खींचकर ले जाने से रास्ते में खराब हो जाते हैं। इन यंत्रों के तवे जमीन से ऊपर उठाकर ले जाने की व्यवस्था से इनका परिवहन सुगमता से संभव हैं।

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