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कृषि प्रसंस्करण : एक रोजगार का विकल्प

कृषि प्रसंस्करण
Written by bheru lal gaderi

फसलोपरांत खाद्य पदार्थों के कृषि प्रसंस्करण की जटिल समस्या हैं। भारत जैसे उष्ण कटिबंधीय क्षेत्र में खाद्यान्नों के कुल उत्पाद का लगभग 25-30% अपर्याप्त संरक्षण के कारण नष्ट हो जाता हैं।

कृषि प्रसंस्करण

खाद्य संरक्षण एक ऐसा क्षेत्र हैं जहाँ अधिक ध्यान देने की आवश्यकता हैं। वैसे तो खाद्य पदार्थों का भंडारण हमारे देश में सदियों से होता आ रहा हैं जिसे अब अलग-अलग तरीकों से प्रसंस्करण, संरक्षण व मूल्य संवर्धन के लिए प्रयोग में लाया जाता हैं। इस प्रक्रियां में काफी मात्रा में खाद्य पदार्थों की हानि होती हैं, जिसे आधुनिक तरीकों की जानकारी प्राप्त कर प्रयोग करने से रोका जा सकता हैं।

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कृषि प्रसंस्करण

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आजकल कृषि प्रसंस्करण केंद्र देश के हर हिस्से में खुले हुए हैं बल्कि कृषि उत्पाद का प्रसंस्करण कर उनकी मूल्य वृद्धि होने के साथ रोजगार के साधन भी उपलब्ध होते हैं। बिच में आने वाले दलालों से भी बचा जा सकता हैं। कृषि उत्पादों के प्रसंस्करण के लिए लघु इकाई प्रसंस्करण उद्धयोग स्थापित किए जा सकते हैं। कृषि प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने के लिए जरूरी हैं की ग्रामीण किसान व महिलायें मिलकर समूह बनाकर आपस में मिलजुल कर इस केंद्र को चलाये। प्रसंस्करण के अंतर्गत किये जाने वाले कार्य हैं।:- कटाई व थ्रेसिंग, सफाई, श्रेणीकरण, सुखाना, भण्डारण व मूल्य संवर्धन करना इत्यादि।

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कटाई

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फसल को सही समय पर काटने से फसल के गुण व मात्रा सही रूप में प्राप्त किये जा सकते हैं। फसल की कटाई के लिए उन्नत किस्मों के औजारों को प्रयोग में लाना चाहिए ताकि कटाई में समय व श्रम कम लगे व उपज का नुकसान भी न हो।

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थ्रेसिंग

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कटाई के उपरांत थ्रेसिंग के लिए भी ट्रेक्टर, मशीनों (बिजली से चलने वाली) व आधुनिक उपकरणों का प्रयोग करना जो क्षेत्र विशेष के लिए उपयुक्त हो।

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सफाई

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सफाई इत्यादि भी मेन्युल (हाथ से) या छलनी (बड़ी) से की जा सकती हैं। ताकि उसमे से मिट्टी या अन्य कोई कूड़ा-करकट हो तो निकल जाये।

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श्रेणीकरण

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सफाई करने के पश्चात् उत्पाद का अगला कदम उसका श्रेणीकरण करना हैं। जिससे उच्च गुणवत्ता का सही मूल्य मिल सकें। श्रेणीकरण की प्रक्रिया प्रसंस्करण केंद्र में हो सकती हैं। इसमें प्रयोग होने वाले यंत्र व मशीन खरीद कर किसान व किसान महिलाए उनका प्रयोग कर सकते हैं।

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सुखाना

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कृषि उत्पादों को कटाई के उपरांत भण्डारण से पहले सुखाना पड़ता हैं। यदि कृषि उत्पाद को सही ढंग से नहीं सुखायेंगे तो उसमे मौजूद नमी के कारण जीवाणु उसे खराब कर देंगे। आमतौर पर प्राकृतिक रूप से सोर ऊर्जा का प्रयोग सुखाने के लिए किया जाता हैं क्योंकि यह सस्ती होने के साथ-साथ 8-10 महीने उपलब्ध रहती हैं। आजकल सोर ऊर्जा चलित हीटर/ड्रायर बाजार में उपलब्ध हैं। इसके अलावा यांत्रिकी शुष्कों का प्रयोग भी कृषि उत्पादों को सुखाने के लिए किया जा सकता हैं ताकि उनकी खराब होने की दक्षता को कम किया जा सके। कृषि उत्पादों को भंडारित करने से पहले अच्छे से सूखा लेना चाहिए।

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भंडारण

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भंडारण उत्पाद को भंडारण करके, रोक कर, स्टोर कर, उसे अच्छे मूल्य के समय बाजार में बेचना। कृषि प्रसंस्करण केंद्र के अंतर्गत ग्रामीण महिलाये व किसान विभिन्न फसलों जैसे दाल-चावल, अनाज इत्यादि का प्रसंस्करण भी कर सकते हैं।

चावल प्रसंस्करण

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चावल प्रसंस्करण भारत का सबसे बड़ा कृषि प्रसंस्करण उद्योग हैं जो की उत्पादन क्षेत्रों तक ही सिमित हैं। किसान अपना धन, मिल मालिकों को सस्ते में बेच देते हैं और मिल मालिक चावल का प्रसंस्करण व पालिस इत्यादि करके अच्छे व महंगे दामों में बेच देते हैं। यदि किसान चावल प्रसंस्करण में काम आने वाली मशीनों जैसे रोलर, पॉलिशर, क्लीनर, ड्रायर, ग्रेडर इत्यादि खरीद ले तो वे ना केवल बचे हुए ब्रान (छिलका ) को बेच कर अपने आप फायदा उठा सकते हैं।

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गेहू प्रसंस्करण

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चावल के पश्चात गेहू प्रसंस्करण उद्योग हैं जिससे किसान फायदा उठा सकते हैं। यह आवश्यक नहीं हैं की किसान व्यक्तिगत/अकेले ही आटा चक्की लगाये जबकि किसान व महिलाये समूह बनाकर भी गेहू प्रसंस्करण की मशीने लघु स्तर पर स्थापित कर विभिन्न उत्पाद बनाकर आकर्षक पेकिंग में पैक करके बेच सकती हैं। गेहू के प्रसंस्करण उत्पाद विभिन्न प्रकार का दलिया, आटा, सूजी, मेदा, सेविया सिरा इत्यादि बनाये जा सकते हैं। आजकल घरों में बाजार से सीधे ब्रांड आटा का उपयोग बढ़ रहा हैं। अतः आटा की मांग निरंतर बनी रहती हैं।

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दाल प्रसंस्करण

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चावल व अनाज गेहू के साथ दाल का भी विशेष महत्व हैं। क्षेत्र विशेष में उत्पादित दालों को किसान प्रसंस्करण करके इसे भी गृह उद्योग के रूप में अपना सकते हैं। अलग-अलग विधियां हैं जिसे ट्रेनिंग द्वारा किसान सिख सकते हैं। इसे अलग से प्रसंस्करण उद्योग के रूप में अपनाकर या किसी भी पहले से उपलब्ध कृषि प्रसंस्करण केंद्र का एक हिस्सा बनाकर कुछ मशीने जैसे एमरी रोलर (छिलका उतारने के लिए उपयोग होती हैं) या आधुनिक मशीनों को खरीदकर पहले से केंद्र में उपलब्ध मशीनों को प्रयोग कर सकते हैं। महिलाये 5-10 या 15-20 मिलकर स्वयं सहायता समूह बनाकर दालों के उपउत्पाद, बड़ी, पापड़ आदि तैयार कर इसे उद्योग के रूप में अपना सकते हैं।

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मसाला प्रसंस्करण

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कृषि प्रसंस्करण केंद्र को ज्यादा अनुकूल व मुनाफा कमाने के लिए विभिन्न मसालों को प्रसंस्कृत किया जा सकता हैं। जैसे:- धनिया, मिर्च, हल्दी, गर्म मसाला व अन्य मसले जो क्षेत्र विशेष में होते हो, तो उन्हें अच्छे से साफ करके अलग-अलग साइज में आकर्षक पैकेट बनाकर बेच सकते हैं।

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तेल निकालने का लघु उद्योग

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अनाज व दालों व मसालों के प्रसंस्करण के साथ-साथ तेल भी हमारी आवश्यकता का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। बाजार से या इंडस्ट्री से छोटी क्षमता के तेल एक्सपेलर, फ़िल्टर इत्यादि लगाकर तेल उद्योग भी प्रसंस्करण के साथ अपनाया जा सकता हैं। आजकल एकीकृत फग्सल प्रणाली अपनाने को कहा जाता हैं अतः एकीकृत उद्योग भी अपनाना चाहिये क्योंकि यदि हम एक ही फसल को लेकर चलेंगे तो एक ही फसल का प्रसंस्करण कभी-कभी संभव नहीं होता हैं क्योंकि कच्चा माल भी अनुपलब्ध हो सकता हैं।

कृषि प्रसंस्करण (AgroProcessing) केंद्र को किसान महिलाये समूह में अपने गांव के सेंटर स्थान या जो लोगों के लिए सुविधाजनक हो शुरू करके मुनाफा कमा सकते हैं।

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कृषि प्रसंस्करण में ध्यान देने योग्य बातें

केंद्र में कार्यरत सभी कर्मचारी किसान महिलायें आपस में सभी बातों को सरल व सीधे पेश करें व ईमानदार रहें।

  • शुरू में लगने वाली पूंजी का निवेश बराबर-बराबर अपने क्षेत्र के फसल चक्र के अनुसार प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करें व उत्पाद के अनुसार ही क्षमता तय करें।
  • उत्पाद को बाज़ार में उतारें, पहले अपने घर की जरूरत को पूरा करें।
  • मशीनों को संचालित करने के लिए बिजली, डीजल इंजन या जनरेटर की आवश्यकता पड़ेगी अतः सही जानकारी व खर्च इत्यादि का पहले ही हिसाब लगा लें।
  • उत्पाद बनाने में मात्रा की बजाय गुणवत्ता पर अधिक ध्यान दे।
  • पैकेजिंग, लेबलिंग इत्यादि का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
  • बाजार में बहुत कम्पीटिशन (प्रतिस्पर्धा) हैं अतः उसके हिसाब से ही पैकेजिंग आकर्षक पैक में व अलग-अलग मात्रा में गुणवत्ता करें।
  • अतः खाद्य पदार्थों का प्रसंस्करण करके उनके मूल्य की वृद्धि की जाये तो न केवल किसानों/महिलाओं को फायदा मिलेगा बल्कि वे आत्मनिर्भर होकर बेरोजगारी की समस्या से भी निजात पा सकेंगे।

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