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कांकरेज गाय की विशेषता एवं सम्पूर्ण जानकारी

कांकरेज गाय
Written by Vijay dhangar

भारत में किसानी के साथ-साथ पशुधन आर्थिक सुदृढ़ता का परिचायक है। पशुधन (गाय, भैंस, भेड़, बकरी) भी देश की आर्थिक व्यवस्था का एक घटक है। देश में श्वेत क्रांति के आगाज के साथ अब पशुधन के लिए अनुवांशिक संसाधनों का वैज्ञानिक प्रबंधन संरक्षण जरूरी हैं। वर्तमान परिपेक्ष्य में बदलती जलवायु वातावरण पशुपालन के लिए ज्वलंत मुद्दा है इसमें सुधार तभी संभव है जब परिवर्तनों से प्रभावित उत्पादन की दशा एवं दिशा का पूर्ण ज्ञान हो पशुधन की वंशावली उनका दूध मांस उत्पादन जनन एवं प्रजनन क्षमता होने वाली बीमारियों आदि का लेखा-जोखा रखा जाना जरूरी हैं। (कांकरेज गाय)

वर्तमान में अमेरिका, यूरोप एवं ऑस्ट्रेलिया में पशुधन की बहुत सारी प्रजातियों के पहचान नंबर, उनकी गुणवत्ता, उत्पादन क्षमता एवं अनुवांशिकी संरचना पर आंकड़े उपलब्ध हैं इन आंकड़ों पर प्रतिदिन अध्ययन करके आधुनिक बनाया जाता है, जिससे अधिक से अधिक दूध का उत्पादन किया जा सके। भारत में इस तरह की व्यवस्था व प्रबंधन बहुत जरूरी है। इससे ना केवल देश में गोवंश से अधिक दूध उत्पादन किया जा सकता है, बल्कि उचित प्रबंधन कर किसानों की आय भी बढ़ाई जा सकती है, जिससे भविष्य में गोवंश के संरक्षण में सहायता मिलेगी। साथ ही देश में दूध की आपूर्ति वांछित मांग के अनुरूप हो सकेगी। हमारे देश में गायों की कई नस्लें पाई जाती हैं जिनमे से आज हम गाय की कांकरेज नस्ल के बारे में जानकारी देंगे:-

परिचय

कांकरेज नस्ल की गाय को गुजरात राज्य में बनासकंथा जिले के कांकरेज शहर में उत्पन्न माना जाता हैं कांकरेज गाय राजस्थान के दक्षिण-पश्चिमी भागों में भी पाई जाती है, । इस पशु को दूध उत्पादन और कृषि उद्देश्यों के लिए उत्तम माना जाता है इस नस्ल के बैल भी अच्छे भार वाहक होते हैं। अतः इसी कारण इस नस्ल के गौवंश को ‘द्वि-परियोजनीय नस्ल’ कहा जाता है ये सर्वांगी जाति की गाए हैं और इनकी माँग विदेशों में भी है। इस नस्ल के अच्छे गुणों की पहचान करके इसे ब्राजील में भी संरक्षित किया गया है. यह भारत की प्राचीन नस्ल मानी जाती है।

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शारीरिक विशेषता

कांकरेज पशु की बहुत अच्छी शारीरिक बनावट होती है यह अपने अर्धचंद आकार के सींगों के लिए जानी जाती है जो इसे अत्यधिक खूबसूरती प्रदान करते हैं दूसरी गायों के मुकाबले इनके सींग काफी मजबूत और तीखे होते हैं कांकरेज गाय भारतीय गायों में सबसे भारी नस्लों से एक है। ये पशु अच्छा गर्मी सहिष्णुता और कीट प्रतिरोधी माने जाते हैं । इनका रंग रुपहला भूरा, लोहिया भूरा या काला होता है। इनके शरीर के बाल छोटे और मुलायम होते है । टाँगों में काले चिह्न तथा खुरों के ऊपरी भाग काले होते हैं। ये सिर उठाकर लंबे और सम कदम रखती हैं।

चलते समय टाँगों को छोड़कर शेष शरीर निष्क्रिय प्रतीत होता है जिससे इनकी चाल अटपटी मालूम पड़ती है। इस नस्ल की गाय अन्य पशुओं में दूर से पहचान ली जाती हैं। यह गर्मियों के उच्च ताप को आसानी से झेल लेती है तथा इसकी रोग-प्रतिरोध क्षमता भी अद्वितीय है।

दूध उत्पादन

कांकरेज गाय अच्छी दुग्ध उत्पादक नस्ल मानी जाती है। इस नस्ल की गाय प्रतिदिन 8 से 10 लीटर तक दूध देती है। इस नस्ल की गाय का वार्षिक दूध उत्पादन लगभग 1800 लीटर तक होता है। आकर्षक बड़ा शरीर, अपने भारवाहक कौशल और अच्छे दुग्ध उत्पादन के कारण कांकरेज गाय भारतीय नस्लों में प्रसिद्द है।

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