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किसानों के मुकाबले उद्योग जगत पर 9 गुना एनपीए ज्यादा

एनपीए
Written by bheru lal gaderi

प्राइवेट की तुलना में सरकारी बैंकों का एनपीए 8 गुना ज्यादा।

राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित खबर के अनुसार एक तरफ देश का किसान बैंकों का कर्ज नहीं चुकाने से आत्महत्या करने पर मजबूर हैं तो दूसरी ओर बड़े उद्योगपतियों की कर्ज से ही पौ बारह हो रही हैं। देश के किसानों का एनपीए (सकल गैर-निष्पादित परिसम्पत्तियां) 66,176 करोड़ रुपए हैं, तो उद्योग जगत पर बैंकों का कुल एनपीए 5,67,148 करोड रुपए है। यानी कॉरपोरेट्स पर 9 गुना ज्यादा एनपीए(NPA) हैं।

कुल एनपीए पर नजर दौड़ाएं तो 7,76,067 करोड रुपए हैं। इसमें से 6,89,806 करोड रुपए सार्वजनिक बैंकों का है।

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कृषि पर सबसे कम लोन प्रोविजनिंग

फिलहाल बैंकों को कृषि ऋण और एमएसएमई कर्ज के लिए 0.25%, कॉर्पोरेट लोन के लिए 0.40% और रियल एस्टेट सेक्टर को लोन के लिए 1% की प्रोविजनिंग करनी पड़ती है। आरबीआई की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार पांच सेक्टरों – इंफ्रास्ट्रक्चर, स्टील, टेक्सटाइल, पॉवर और टेलीकॉम में बैंकों के स्ट्रेस लोन का 60% है।

आरटीआई से हुआ खुलासा

मध्यप्रदेश के नीमच निवासी सामाजिक कार्यकर्ता चंद्रशेखर गौड़ ने सूचना के अधिकार के तहत जो जानकारी हासिल की है, वह इस बात का खुलासा करते हैं कि किसानों और खेती से जुड़े लोगों का एनपीए कुल जमा 66,176 करोड रुपए हैं। इसमें से सार्वजनिक बैंकों का 59,177 करोड़ और निजी बैंकों का 6,999 रूपये है। आरबीआई के ब्योरे के मुताबिक सेवा क्षेत्र का एनपीए 1,00,128 करोड़ रुपए हैं। इसमें सरकारी बैंकों का 83,856 और निजी बैंकों का 16,272 करोड़ रूपये हैं।

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करोड रुपए राइट ऑफ

बैंक के जानकारों की माने, तो एनपीए वह राशि है जिसकी वापसी बैंकों के लिए आसान नहीं है। एक हिसाब से यह डूबत खाते की रकम की श्रेणी में आती है। इस राशि को बैंक राइट ऑफ घोषित कर अपनी बैलेंस शीट को साफ- सुथरा कर सकता है। बीते 5 सालों में बैंकों ने 3,67765 करोड़ रुपए की रकम आपसी समझौते के तहत राइट ऑफ की है। बैंकिंग सेक्टर के जानकार बताते हैं कि बैंकों की खस्ता हालत का एक कारण एनपीए है, तो दूसरा लंबित कर्ज हैं।

स्टील सेक्टर पर सबसे ज्यादा कर्ज

बैंकों को सबसे ज्यादा कर्ज स्टील सेक्टर जिंदल स्टील एंड पावर पर 35,500 करोड़ रुपए का, एस्सार स्टील पर 30,000 करोड़ रुपए का, भूषण स्टील पर 33,400 करोड़ रूपए का कर्ज बकाया है।

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स्त्रोत:- 

राजस्थान पत्रिका

Website – rajasthanpatrika

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