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उद्यानिकी यंत्रीकरण में नवाचार

उद्यानिकी यंत्रीकरण
Written by bheru lal gaderi

देश में उद्यानिकी फसलें 234 लाख हेक्टेयर में उगाई जाती है। इनमे 14% फल, 41% सब्जिया, 2% मसाले, 15% पौध, 19% फूल और 3% अन्य फसलें होती है। (एनएचबी, 2016) इन फसलों के लिए भारतीय अनुसन्धान परिषद् (आईसीआर) और राज्यों के कृषि विश्वविद्यालय तथा निजी क्षेत्र में कई मशीन(यंत्रीकरण) विकसित की गई है। विदेशों में भी भारतीय परिस्थितियों के अनुकूल मशीनें उपलब्ध है। किसान इन मशीनों को अभी भी बड़े पैमाने पर अपना नहीं रहे है।

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बिजली या ईंधन के स्रोत

भारत में ज्यादातर काम हाथ से किया जाता है। गांवों में पशुं की संख्या कम होती जा रही है। इसलिए मशीनें चलाने के लिए पशु भी नहीं मिल पा रहे है। पॉवर टिलर और ट्रेक्टर से चलने वाली मशीने ज्यादा लोकप्रिय है, क्योंकि इनके कई उपयोग है। ये आसानी से उपलब्ध है। वैकल्पिक ऊर्जा के उपयोग के लिए बायोडीजल और सौर ऊर्जा से चलने वाले उपकरण और मशीनरी विकसित की जनि चाहिए।

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विदेशों में जमीं नापने, रोगों की निगरानी, दवाइयों के छिड़काव और कई बार पक्षियों को डराने के लिए का इस्तेमाल काफी किया जाता है। इसके अलावा कटाई और ग्रडिंग के लिए रोबोटिक मशीनों का उपयोग भी बाद रहा है। इन दोनों का उपयोग भारत की उद्यानिकी फसलों के लिए भी किया जा सकता है।

भारत ट्रेक्टरों का सबसे बड़ा निर्माता है। अब नई तकनीक के आर्टिक्युलेटेड ट्रेक्टर बनाने की जरुरत है, जिसमे कब्जेदार इंजन हों। ये ट्रेक्टर बड़ी आसानी से घूम जाते है और इनका उपयोग कम जगह वाले उद्यानिकी खेतों में आसानी से किया जा सकता है।

भूमि विकास                              

जमीन को समतल करने के काम मशीनों से ही होते है, क्योंकि यह भारी काम है। इस काम में संसाधनों को बचाने के लिए आजकल लेजर लेंड लेवलिंग का उपयोग किया जा रहा है। इस उपकरण के कई प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष फायदे है। लेकिन अभी यह किसानों में ज्यादा प्रचलित नहीं हुआ है।

पहाड़ी क्षेत्रों में जहां ट्रेक्टर या पॉवर टिलर नहीं पहुंच सकते है, वहां मल्टीटेरिन और मल्टी यूटिलिटी ट्रेक्टर व्हीकल का उपयोग किया जाता है।

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पौधरोपण सामग्री का उत्पादन

अच्छी गुणवत्ता वाले पौधे और बीजों का उत्पादन समय पर होना चाहिए और किसानों को समय पर मिलना चाहिए। बीज निकलने की प्रक्रिया गुणवत्तापूर्ण हो तो किसानों को समय पर बीज मिल सकता है।

इसके लिए निम्न लिखित मशीनें उपयोगी है।

ग्रोइंग इंडिया सीवर

खेत में उपलब्ध खाद, वर्मीकम्पोस्ट, कोकोपिट और मिट्टी को छानने के लिए मोटर से चलने वाली रोटरी स्क्रीन टाइप मिडिया सीवर का उपयोग किया जाता है। यह 1.5 मिमी. से अधिक मोटाई के कंकड़ पत्थर आदि निकाल देती है। इसकी क्षमता 1 टन प्रति हेक्टेयर है और 0.5 हॉर्स पॉवर की शक्ति की जरूरत होती है।

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एक व्यक्ति छानने योग्य सामग्री डालने के लिए और दूसरा छनि हुई सामग्री एकत्रित करने के लिए चाहिए। इस मशीन में सफाई, मिश्रण और बैग भरने का काम एक साथ हो सकता है।

रोटरी डिबलर कम सीडर

माध्यम श्रेणी की नर्सरियों के लिए रोटरी टाइप डिबलर को बहुत उपयोगी माना जाता है। यह बीज बोन के लिए 10 मिमी. गहरा छेद करता है और एक एक बीज डालता है। इसकी सहायता से एक दिन में 1200 प्रोट्रे तैयार किये जा सकते है और लागत में 75% तक की बचत होती है।

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बीज उत्पादन

कृषि उत्पादन में बीज का सबसे ज्यादा महत्व है। इसकी गुणवत्ता पर ही पूरी फसल निर्भर करती है। अच्छी गुणवत्ता के बीज से ही अच्छी और ज्यादा फसल ली जा सकती है तथा बाजार में बेहतर कीमत प्राप्त की जा सकती है।

अच्छे बीजों के लिए निम्न मशीनों का उपयोग किया जा सकता है।

मशरूम बीज उत्पादन मशीनरी

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मशरूम बीजों के लिए कुछ मशीनों का पूरा सेट तैयार किया गया है। इसमें ग्रेन क्लीन, ग्रेन बॉयलर, बॉयल्ड ग्रेन, और चौक पाउडर मिक्सर, बैग फिलर और स्पॉन इनऑक्युलेटर शामिल है। इनसे श्रम भी बचता है और खराबा भी नहीं होता है। इससे बिजली की आवश्यकता 60% तक और श्रम की आवश्यकता 50% तक कम हो जाती है। इसमें 100-125 बीज उत्पादन हो सकता है।

फलों की फसल के लिए पौधरोपण

इसमें सबसे श्रमसाध्य काम पौधे रोपने के लिए खड्डे बनाना है। इस काम के लिए पोस्ट हॉल डिगर्स और ट्रक्टर चलित मिट्टी खुदाई यंत्र उपयोगी साबित हो सकता है।

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सब्जियों के लिए उठी हुई जमीं तैयार करना

उठी हुई जमीन पर सब्जियां पैदा करने से मशीनों का उपयोग ज्यादा संभव हो पता है। यह अधिक बारिश और सिंचाई वाले क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी है। क्योंकि बारिश ज्यादा होने पर पानी अपने आप बहकर निकल जाता है। उठी हुई जमीं तैयार करने के लिए बाजार में कई उपकरण उपलब्ध है।

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मल्च से ढकना

सब्जियों की फसलों में सबसे बड़ी समस्या नमी का रह जाना और खरपतवार पैदा होना हैं। इसे रोकने के लिए प्लास्टिक मल्च का उपयोग किया जाता हैं। पौधे रोपने से पहले प्लास्टिक फिल्मे बिछाई जाती हैं। यह काम हाथ से किया जाए तो बहुत श्रमसाध्य और समय लेने वाली मल्च लेइंग मशीने बनाई गई हैं। इससे आसानी से प्लास्टिक बिछाने का काम हो जाता हैं और समय तथा श्रम की बचत होती हैं।

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बीज बोना और प्रत्यारोपण

बीज बोने के लिए कई तरह की मशीने(यंत्रीकरण) उपलब्ध हैं जो हाथ से भी चलती हैं। किसान अपनी सुविधा और आवश्यकता के हिसाब से इसका चयन कर सकता हैं।

कुछ मुख्य मशीने(यंत्रीकरण) निम्न हैं-

सब्जियों की विभिन्न फसलों के लिए प्लांटर्स

सब्जियों में खरपतवार काफी होती हैं। खेत को इससे मुक्त रखना जरूरी हैं। इसके लिए सब्जियों को एक निश्चित दुरी पर कतार में बोया जाता हैं और मिट्टी से ढक दिया जाट हैं। कई बार पौधे रोपते समय ही उर्वरक डालने वाली मशीनों को भी इससे जोड़ दिया जाता हैं। वेक्यूम प्लांटर्स, इंक्लाइंड प्लेट और मल्टी क्रॉप सीडर जैसी मशीनों का उपयोग इसके लिए काफी होती हैं।

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सब्जी प्रत्यारोपण के लिए मशीनरी(यंत्रीकरण)

प्रत्यारोपण मशीने हस्तचलित, मेकेनिकल और ऑटोमेटिक तीनों तरह की होती हैं। किसान अपनी आवश्यकतानुसार तीनों में से किसी का भी चयन कर सकता हैं। टमाटर, गोभी, मिर्च और बेंगन के लिए ट्रेक्टर चलित सेमी ऑटोमेटिक थ्री रो प्लग टाइप ट्रांस्प्लान्टर भी तैयार किया गया हैं।

इंटर कल्टीवेशन के लिए मशीन(यंत्रीकरण)

सब्जियों की फसल की सबसे बड़ी दुश्मन खरपतवार हैं। यह फसल का पानी, पोषण और जगह ले लेती हैं। खरपतवार हटाने के लिए इंटरकल्चर ऑपरेशन किए जाते हैं। इसके लिए रोटरी टिलर, रो क्रॉप कल्टिवेटर्स आदि काम में लिए जाते हैं। इसके अलावा हस्तचलित औजारों का उपयोग भी होता हैं।

फलोद्यान में खरपतवार

फलोद्यान में उग आए अवांछित पौधों को काटना जरूरी होता हैं। इसके लिए ट्रेक्टर चलित कल्टीवेशन रोटावेटर, रोटॉलेशर और पावर टिलर ऑपरेटेड रोटोवेटर का उपयोग सबसे ज्यादा होता हैं। पेड़ के तने के आसपास उग आई खरपतवार को साफ करने की मशीन भी उपलब्ध हैं। यह इसे साफ कर बून्द-बून्द सिंचाई को सम्भव बनाती हैं। आमों के पेड़ों की काट-छत समय-समय पर जरूरी हैं। इसके लिए भी कई उपकरण मौजूद हैं। ऊँचे पेड़ों की छटाई के लिए ट्रेक्टर चलित हाइड्रोलिक प्लेटफार्म और हाइड्रोलिक प्रूनर उपलब्ध हैं।

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छिड़काव

फलोदध्यानों में दवाई के छिड़काव के लिए रॉकर आम स्प्रेइंग मशीन और इंजन ऑपरेटेड पावर स्प्रेयर का उपयोग किया जाता हैं। पेड़ों के पुरे झुरमुट के लिए आईआईएचआर ट्रेक्टर चलित हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म और पॉवर स्प्रेयर का उपयोग किया जा सकता हैं। इसी तरह सब्जियों की फसलों में छिड़काव के लिए बूम स्प्रेयर का उपयोग किया जाता हैं।

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कटाई

फलोद्यान में सबसे बड़ा काम फल तोडना या कटाई हैं। इस काम को पेड़ हिलाकर और गिरे हुए फल उठाकर किया जाए तो फलों को नुकसान पहुंचने की संभावना रहती हैं। इस काम के लिए कई हस्तचालित उपकरण उपलब्ध हैं जो फलों को बिना नुकसान पहुंचाए तोड़ सकते हैं।

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आईआईएचआर ट्रेक्टर चलित हाइड्रोलिक प्लेटफॉर्म का उपयोग भी बड़े फलोद्यान में किया जा सकता हैं फल को एकत्र करने के लिए जाल का इस्तेमाल किया जाता हैं जमीन पर गिरे हुए फलों को उठाने के लिए भी उपकरण मौजूद हैं। कई मशीने ऐसी भी हैं जो बहुत ऊँचे पेड़ों में भी पूरी ऊंचाई तक पहुंच सकती हैं और फल तोड़े जा सकते हैं।

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खेत पर ही प्रसंस्करण के लिए मशीनरी (यंत्रीकरण)

सब्जियों की ग्रेडिंग बहुत जरूरी हैं, क्योंकि इससे उत्पादक को फसल का अच्छा दाम मिल सकता हैं। ग्रेडिंग से पेकिंग, हेंडलिंग आदि भी आसान हो जाते हैं। ग्रेडिंग में उपज को उसकी विशेषता रंग, आकर और गुणों के हिसाब से छांटा जाता हैं। भारत में यह काम खुद ही किया जाता हैं। यह बहुत ही श्रमसाध्य, समय लेने वाला काम हैं। कई बार इसके लिए मजदूर भी नहीं मिलते। हर देश ने बाजार की जरूरत के हिसाब से ग्रेडिंग के मानक तय कर रखे हैं। ग्रेडिंग के लिए ग्रेडर मशीनों का उपयोग किया जाता हैं और इस तरह की कई मशीने बाजार में उपलब्ध हैं।

उद्यानिकी फसलों में यंत्रीकरण के लिए विचारणीय बिंदु है-

  • उद्द्योग को शामिल करते हुए फसल के हिसाब से यंत्रीकरण के लिए अनुसंधान किया जाए।
  • अनुसंधान और उद्योग के आपसी सहयोग को ज्यादा व्यावहारिक और परस्पर उपयोगी बनाया जाए।
  • विभिन्न योजनाओ के तहत बड़े पैमाने पर फिल्ड परीक्षण किए जाए।
  • विभिन्न क्षेत्रों में कृषि यंत्र बनाने और आपूर्ति करने वाले केंद्र स्थापित किए जाए।
  • कृषि यंत्रों का परीक्षण तेजी से हो।
  • कृषि यंत्रों के विकास और रखरखाव के लिए मानव संसाधन विकास किया जाए।

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Arthor :-

जी. सेंथिल कुमारन

प्रिंसिपल साइंटिस्ट

ए. कोरोलीन रथिनकुमार

सीनियर संटिस्ट

इंडियन इंस्ट्रीट्यूट ऑफ़ हॉर्टिकल्चर रिसर्च, हेसरगट्टा लेक, बेंगलुरु

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