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उड़द किस्म पीयू-31:- बारां जिले के लिए वरदान

उड़द किस्म पीयू-31
Written by bheru lal gaderi

बारां जिले के ग्राम कोटडी निवासी रामचंद्र नगर विगत 5 वर्षों से उड़द की खेती कर रहे हैं। नागर के पास कुल 18 बीघा जमीन हैं। नागर के परिवार में दो लड़के हैं, जो कृषि से संबंधित कीटनाशी कंपनी में कार्यरत होने के कारण अपने पिता के द्वारा किए जाने वाले कार्य में हाथ बटाते हैं। इसके पास कृषि यंत्र ट्रेक्टर, सीडड्रिल, थ्रेसर, हीरो, स्प्रेयर, लहसुन तुड़ाई यंत्र हैं। पहले उड़द (उड़द किस्म पीयू-31) की स्थानीय किस्म की खेती करके स्वयं आपूर्ति हेतु बुवाई करते थे।

उड़द किस्म पीयू-31

कृषि विज्ञान केंद्र अंता द्वारा खरीफ 2014 में राष्ट्रीय कृषि विकास परियोजना (दलहन प्रोत्साहन) एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन में प्रदर्शन हेतु उनका चयन किया गया। परियोजना से पूर्व उनके कृषि स्थिति का विश्लेषण में पाया गया कि वह केवल 2 बीघा में ही उड़द और मूंग की खेती करते थे। कृषि विज्ञान केंद्र अंता द्वारा कोटडी गांव को गोद लिए जाने के बाद गांव में उड़द की खेती में वर्ष 2017 में एक मिसाल कायम की तथा पैदावार में भी 16.5 से 18.40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन प्राप्त किया।

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उड़द किस्म पीयू-31 का प्रदर्शन

उड़द फसल के अंतर्गत अधिक क्षेत्रफल का मुख्य कारण शीघ्र फसल उत्पादन, कम लागत व कम पानी की आवश्यकता है, जिसके कारण सोयाबीन फसल के क्षैतिज फैलाव में कमी आई, जिसका स्थान उड़द ने लिया।  वर्ष 2017 में उड़द किस्म पीयू-31 का प्रदर्शन राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (दलहन प्रोत्साहन) एवं राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मिशन के अंतर्गत 50 हेक्टेयर क्षेत्रफल में 125 किसानों को आवंटित किया गया। केंद्र द्वारा उड़द वर्ष 2017 के प्रदर्शन के आंकड़ों से स्पष्ट है कि रामचंद्र ने सर्वाधिक 18.40 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उपज प्राप्त कर एक मिसाल कायम की है। परियोजना के पूर्व वर्ष 2012 में बारां जिले में उड़द का क्षेत्रफल 5500 हेक्टेयर था, जो बढ़कर वर्ष 2017 में 89000 हेक्टेयर हो गया।

वर्ष उपज (क्वी./ है.) कुल लागत (रु./है.) कुल आय (रु./ है.) शुद्ध आय (रु./ है.)
2012-13 10.48 10000 62880 52880
2013-14 10.40 10000 62000 52000
2014-15 12.22 12000 73320 60320
2015-16 13.89. 13000 83340 70340
2016-17 14.30 15000 78650 63650
2017-18 18.40 15000 99360 84360

 

अब इनकी कृषि प्रणाली को देखकर कोटड़ी ग्राम के अन्य कृषक भी दलहन की खेती करके अधिक आमदनी प्राप्त करने के इच्छुक हैं। नागर उड़द की पूरी उपज को बीज में रखकर वर्ष 2018 में काम में लेंगे।

कृषि तकनीक

बारां जिले की मिट्टी काले होने के कारण उड़द की खेती खरीफ में ढालू जमीन पर की जाती है। उड़द (उड़द किस्म पीयू-31) का बीज 18 की.ग्रा. प्रति हेक्टेयर की दर से बुवाई करते हैं। बीज उपचार हेतु कार्बेंडाजिम 2 ग्राम प्रति किग्रा कि दर से करते हैं। बुवाई का सर्वोत्तम समय जून का अंतिम सप्ताह या जुलाई का प्रथम सप्ताह पाया गया है। कीट एवं बीमारी नियंत्रण हेतु कार्बेन्डाजिम 2 किग्रा./हेक्टेयर की दर से करते हैं। कीट एवं बीमारी नियंत्रण हेतु ट्राइकोडर्मा, फेरोमेन ट्रेप, थाइमिथोएट, मेंकोजेब आदि का उपयोग किया जाता है। खरीफ में खरपतवार अधिक होने के कारण फसल बुवाई के 20 दिन बाद इमिजाथापर 500 ग्राम प्रति हेक्टेयर की दर से छिड़काव करते हैं।

प्रस्तुति

सुभाष असवाल, टी.सी. वर्मा, मनोज जाट, डी.के.सिंह,

कृषि विज्ञान केंद्र, अंता, जिला- बारा (राज.)

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