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‘ई-नाम’ (राष्ट्रीय कृषि बाजार) कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण

'ई-नाम' (राष्ट्रीय कृषि बाजार) कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण
Written by bheru lal gaderi

देश के कृषि बाजार प्रतिस्पर्धा, विखंडन, अक्षमता, अत्यधिक मध्यस्थों (बिचौलियों) की उपस्थिति और लगातार कीमत उतार- चढ़ाव की विशेषता रखते हैं। इलेक्ट्रॉनिक (ई-नाम) राष्ट्रीय कृषि बाजार कृषि विपणन की प्रणाली को बदलने के लिए आधुनिक तकनीक का उदाहरण है।

'ई-नाम' (राष्ट्रीय कृषि बाजार) कृषि क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण

Image credit- किसान समाधान

देश में डिजिटल प्रौद्योगिकी द्वारा कृषि क्षेत्र में अनुप्रयोग सुनिश्चित करने के कई बार प्रयास निरंतर किए जा रहे हैं। कृषि को डिजिटल प्रौद्योगिकी से जोड़कर उन्नत फसल की पैदावार एवं विपणन के लिए सरकार ने इससे जुड़ी कई योजनाओं के साथ कार्य शुरू किया है एवं वर्तमान में सरकार ने नेशनल ई- गवर्नेंस प्लान इन एग्रीकल्चर पूरे देश में लागू कर रही है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य पूरे भारत में सूचना संचार के माध्यम से कृषि विकास को गति देना है, जैसे ई- नाम पोर्टल की परिकल्पना कृषि विपणन क्षेत्र में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए एक प्रारंभिक बिंदु के रूप में विकसित की गई है।

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कार्य क्षेत्र 

यह न केवल कृषि विपणन के पारदर्शिता स्थापित करेगा वरन किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए एक मूल्य खोज तंत्र का निर्माण करेगा, बल्कि मंडी में स्थानीय व्यापारियों को ई- नाम पोर्टल एक व्यापक बाजार प्रदान करेगा। जहां पर किसानों को एकल खिड़की के रूप में राष्ट्रीय कृषि बाजार, नामांकित मंडियों, जिंसों का संपूर्ण विवरण व जानकारी प्राप्त होगी। जिससे थोक खरीदार, निजी कंपनियां, प्रसंस्करण कर्ता (प्रोसेसर) निर्यातक आदि स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष व्यापार करने में सक्षम हो जाएंगे एवं ई- नाम पोर्टल से राज्य की सभी मंडियों के एकीकरण के लाइसेंस जारी करने, लेनदेन शुल्क और उत्पादन की मुक्त आवाजाही के लिए सामान्य प्रक्रियाओं को कम किया जाएगा एवं परिणामस्वरुप धीरे-धीरे किसानों को उनकी उपज का अधिक व उचित समय लाभकारी मूल्य प्राप्त होगा जिससे उपज के भुगतान के लिए लंबे समय का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।

इस प्रक्रिया में एक और स्थानीय मंडियों की क्षमताओं का प्रयोग किया जाएगा, वहीं दूसरी ओर मंडियों का एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनेगा जो ऑनलाइन उपलब्ध करवाएगा। जिसमें किसानों को सहायता करने और उत्पादन स्थल (खेतों) में विपणन स्थल (मंडियों) के बीच के अंतराल को कम करने के लिए महत्वपूर्ण भूमिका अदा करेगा। यह अखिल भारतीय पहल है जो खरीद और कृषि जिंसों की बिक्री में पारदर्शिता सुनिश्चित करेगा। यह सभी मंडियों की ऑनलाइन सुविधा द्वारा एक- दूसरे को जोड़ें रहेगा, इसके परिणाम स्वरुप एक राष्ट्रीय नेटवर्क बनने में मददगार साबित होगा।

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क्या है राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम)

राष्ट्रीय कृषि बाजार एक अखिल भारतीय इलेक्ट्रॉनिक ट्रेंडिंग पोर्टल है जिसका शुभारंभ 14 अप्रैल, 2016 को महू (मध्यप्रदेश) में प्रधानमंत्री ने किया था। जिसमें मौजूदा कृषि उपज विपणन समिति (एपीएमसी) और अन्य कृषि मंडियों को नेटवर्क से जोड़कर एक विशाल बाजार का निर्माण किया है। राष्ट्रीय कृषि बाजार कहने को तो एक वर्चुअल बाजार है लेकिन यह किसी भी किसान/ व्यापारी को देश की किसी भी मंडी कृषि मंडी में सामान खरीदने व बेचने की सहूलियत देता है।

राष्ट्रीय कृषि बाजार कोई दूसरा या वैकल्पिक बाजार नहीं है बल्कि मौजूद मंडियों को ही एक नेटवर्क से जोड़कर किसानों और कृषि व्यापारियों को आमने-सामने कर देता है। यह तकनीकी के जरिए खरीदारों को देश की विभिन्न मंडियों से जोड़ता है जिससे खरीददार किसी दूसरे राज्य में बैठकर भी किसी और राज्य की मंडी से सामान का भाव पता कर सकता है और माल खरीद भी सकता है।

(ई-नाम) राष्ट्रीय कृषि बाजार की आवश्यकता

यह कृषि उपज की बिक्री के लिए एकीकृत बाजार उपलब्ध कराता है और फसलों की उपज से उनकी बिक्री तक के सफर को बेहद आसान बनाता है। मौजूदा व्यवस्था में कृषि मंडीया अलग- अलग रह कर व्यापार में भाग ले रही है। जगह-जगह पर सामान की कीमतों में फर्क पाया जाता है और कई स्तरों पर बिकने की वजह से उपभोक्ताओं को वस्तु का काफी अधिक मूल्य चुकाना पड़ता है। यहां तक कि एक ही राज्य की विभिन्न मंडियों में चीजों का मूल्य अलग-अलग पाया जाता है। व्यापारियों को एक राज्य के विभिन्न बाजारों में कृषि उपज खरीदने के लिए भी अलग- अलग लाइसेंस लेने पड़ते हैं जिसका सीधा असर वस्तुओं की कीमतों पर पड़ता है।

एक ही राज्य में कृषि उपज को एक मंडी क्षेत्र से दूसरे मंडी क्षेत्र में ले जाने पर भी कई स्थानों पर दोबारा मंडी शुल्क देना पड़ता है जिसकी वजह से वस्तुओं की कीमतें बढ़ती है। राष्ट्रीय कृषि बाजार में व्यापारियों को इन परेशानियों से मुक्ति मिलेगी और देश एक एकीकृत बाजार में बदल जाएगा जिससे कृषि उपज के मूल्य स्थिर होंगे।

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ई-नाम के चरण

राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम मार्च 2018 तक कृषि, सहकारिता एवं किसान कल्याण (डीएसी और परिवार कल्याण) द्वारा ई-नाम में शामिल राज्यों/ संघ राज्य क्षेत्रों में चुने गए 585 विनिमय थोक बाजार को जोड़ने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। जिसमें मार्च 2017 तक 400 विनियमित थोक बाजार या कृषि उत्पादन बाजार समिति को एकीकृत ई-नाम प्लेटफार्म से जोड़ना प्रस्तावित किया गया है।

लघु कृषक कृषि व्यवसाय कंसोर्टियम (एसएफसी) सामरिक भागीदारी (सपा) के तकनीकी सहयोग कार्यान्वयन एजेंसी के रूप में काम कर रही है। कृषि मंडियों सॉफ्टवेयर और राज्यों/ केंद्र शासित प्रदेशों को संरचनात्मक ढांचा हार्डवेयर, गुणवत्ता परीक्षण लेबोरेट्री के लिए एकमुस्त राशि ₹30 लाख तक  प्रति मंडी कि दर से उपलब्ध करा रही है, और यह लागत से मुक्त रखने में सहायक रहेगा। इसके लिए फंड आवंटन एवं आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति एग्री टेक इंफ्रास्ट्रक्चर फंड के माध्यम से राष्ट्रीय कृषि बाजार को बढ़ावा देने के लिए एक केंद्रीय योजना कृषि प्रौद्योगिकी इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (आतिफ) को मंजूरी दी गई है। इसके लिए सरकार द्वारा रुपए का आवंटन किया गया है जो नवनिर्मित कृषि प्रौद्योगिकी इंफ्रास्ट्रक्चर फंड (आतिफ) करने के लिए 200 करोड़ रुपए की राशि उपलब्ध कराई जा रही है। इसके साथ एसएफसी 2015-16 से 2017-18 के लिए 3 साल के लिए ई-नाम को लागू करेगा।

यह नया मंच किसानों को अपनी कृषि उपज (उत्पाद) बेचने के लिए उत्तम बोली लगाने वाले व्यापारियों को आमंत्रित करेगा। देश में यह शुरू में 8 राज्यों में 21 कृषि बाजारों, उत्तर प्रदेश (6), गुजरात (3), तेलंगाना (5), राजस्थान (1), मध्य प्रदेश (2), हरियाणा (2), झारखंड (1) और हिमाचल को एकीकृत करने का लक्ष्य रहेगा। जिसके अंतर्गत ई-नाम मंच वर्तमान में मुख्यतः 69 कृषि जींस जैसे-  गेहूं, धान, मक्का, प्याज, ज्वार, बाजरा, मूंगफली, आलू, सोयाबीन और सरसों सहित कई महत्वपूर्ण वस्तुओं के रूप में, ई- व्यापार कृषि मंत्री के लिए चयनित किया गया हैं। फिलहाल फलों और सब्जियों को अभी तक इसमें शामिल नहीं किया गया है।

अब तक देश में 10 राज्यों की 249 एपीएमसीएच व मंडियों में ई-नाम प्लेटफार्म की शुरुआत हो चुकी है जिसके अंतर्गत गुजरात(40), तेलंगाना (44), राजस्थान(11), मध्य प्रदेश(44), उत्तरप्रदेश (66), हरियाणा (36), झारखंड (8), हिमाचल प्रदेश (7), छत्तीसगढ़ (5) और आंध्र प्रदेश (12) आदि। अब तक देश के 14 राज्यों में 399 एपीसीएम को जोड़ना प्रस्तावित है। अब तक 421 करोड रुपए कृषि (1,53,9992.70) मेट्रिक टन (कृषि उत्पाद) का कारोबार ई-नाम पर हो चुका है। अब तक 1,60,229 किसानों, 46,970 कमीशन एजेंट, को ई-नाम प्लेटफार्म पर पंजीकृत किया जा चुका है। सभी शेयर धारक (स्टॉक होल्डर) और खासकर मंडी और विपणन मंडल अधिकारियों की सक्रिय भागीदारी से यह कार्यक्रम सफल हो रहा है। किसानों की आय बढ़ाने में भारी योगदान देगा।

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ई-नाम के घटक/ उद्देश्य

राष्ट्रीय ई-बाजार पारदर्शी बिक्री, लेनदेन और विनियमित बाजारों में मूल्य खोज शुरू करने के लिए मंच है। तैयार स्टेट्स के हिसाब से उनकी राज्य कृषि विपणन बोर्ड। एपीएमसी द्वारा व्यापार को बढ़ावा देने के लिए अपने एपीएमसी अधिनियम में उपयुक्त प्रावधान लागू करना है।

राज्य के अधिकारियों द्वारा व्यापारियों/ खरीदारों और कमीशन एजेंटों को बाजार यार्ड में किसी पूर्व शर्त के बिना भौतिक उपस्थिति या दुकान/ परिसर के कब्जे के विवरण लाइसेंस देना है।

  • इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग का प्रावधान।
  • राज्य की सभी मंडियों (बाजारों) में खरीदारी करने के लिए एकल (सीगल) वैध लाइसेंस का प्रावधान।
  • राज्य में एक ही स्थान पर मंडी शुल्क का प्रावधान।

खरीददारों द्वारा हर बाजार में कृषि उपज का (गुणवत्ता परीक्षण) और प्रावधान की गुणवत्ता मानकों के समानीकरण बुनियादी ढांचे परख करने के लिए सूचित बोली को सक्षम करने की क्रिया अपनाई जा रही है। अब तक आम व्यापार योग्य मानकों के लिए 69 वस्तुओं के लिए विकसित किया गया है।

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राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) की संरचना एवं कार्य प्रणाली

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के व्यापार पोर्टल को कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार, द्वारा विकसित किया जा रहा है तथा इसकी स्थापना पर होने वाला खर्च भारत सरकार द्वारा उठाया जाएगा। प्रत्येक कृषि उपज मंडी को राष्ट्रीय कृषि बाजार से जोड़ने के लिए आवश्यक अधोसंरचना, परीक्षण आदि पर खर्च भारत सरकार द्वारा ही बाहर किया जाएगा। इस प्रकार राष्ट्रीय कृषि बाजार से जुड़ने के लिए कृषि उपज मंडी का प्रारंभिक व्यय नहीं होगा।

कृषि एवं कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार ने लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफएसी) को इस परियोजना का मुख्य प्रबंधक नियुक्त किया है। लघु कृषक कृषि व्यापार संघ (एसएफसी) रणनीतिक साझेदार (स्ट्रेटेजिक पाइनर) की सहायता से राष्ट्रीय कृषि बाजार की मंडियों को कार्यान्वित करेगा।

राष्ट्रीय कृषि बाजार (ई-नाम) के लाभ (उपयोगिता)

भारत की 58% आबादी अपनी आजीविका के लिए कृषि पर निर्भर है। राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम को एक ऐसी व्यवस्था के रूप में विकसित किया गया है जिससे कि इससे जुड़े हर वर्ग को लाभ मिल सके। किसान को राष्ट्रीय कृषि बाजार के माध्यम से कृषि उत्पाद के विक्रय से अधिक दाम मिलने की संभावना है। स्थानीय व्यापारियों को अपने ही प्रदेश के अन्य भागों में तथा अन्य राज्यों में कृषि उत्पाद खरीदने व बेचने के अवसर प्राप्त होंगे। थोक व्यापारियों एवं मिल संचालकों को सीधी राष्ट्रीय कृषि बाजार ई-नाम के माध्यम से दूर स्थित मंडियों से कृषि उत्पाद खरीदने का मौका मिलेगा।

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ग्राहकों को ऊपर आसानी से उपलब्ध होगी एवं मूल्य भी स्थिर रहेगा। बड़े पैमाने पर खरीद होने से गुणवत्ता सुनिश्चित होगी तथा बिक्री नहीं होने के कारण उत्पाद खराब नहीं होगा। देश की सभी मंडियों के धीरे-धीरे राष्ट्रीय कृषि बाजार नेटवर्क से जुड़ने के फलस्वरुप भारत में पहली बार एक राष्ट्रीय कृषि बाजार विकसित होगा।

इसके फलस्वरुप देश में ही नहीं परंतु अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी भारत को कृषि उत्पादों के विक्रय की निम्न सुविधाएं होगी।

  • किसानों के लिए, ई-नाम को उनकी उपज और प्रतिस्पर्धी रिटर्न बेचने के लिए और अधिक विकल्प प्रदान करेगा।
  • स्थानीय व्यापारियों के लिए ई-नाम माध्यमिक व्यापार के लिए व्यापक राष्ट्रीय बाजार के लिए पहुंच प्रदान करेगा।
  • थोक खरीदारों, कटाई उपरांत प्रक्रिया को अंजाम, निर्यातकों के लिए, ई-नाम स्थानीय मंडी व्यापार में प्रत्यक्ष भागीदारी को सक्षम, मध्यस्थता लागतो में कमी लाएगा।
  • स्थिर कीमतों और उपभोक्ता के लिए कृषि उत्पादों की उपलब्धता को बढ़ावा मिलेगा।
  • मंडियों के लिए और हिसाब- किताब (रिपोर्टिंग प्रणाली) रखने में कमी रहती है, जो स्वचालित रूप से संपन्न कर रहे हैं के संदर्भ में ई-नाम लाभ बेहतर निगरानी और व्यापारियों और कमीशन एजेंट के विनियमन एवं पूरी तरह से पारदर्शी प्रणाली है जो निविदा/ नीलामी प्रक्रिया कि जानबूझकर संयुक्त राष्ट्र की गड़बड़ी की गुंजाइश को समाप्त करेगा, लेखांकन के माध्यम से बाजार शुल्क संग्रह में सुधार, निविदा/ नीलामी प्रक्रिया के रूप में जनशक्ति आवश्यकताओ में कमी, प्रणाली के माध्यम से जगह लेगा (इस प्रणाली के कुछ ही सेकंड के भीतर बहुत से बाजारों में हजारों किसानों के लिए विजेता घोषित करने में मदद करता है।) विश्लेषण और आगमन और कीमतों की भविष्यवाणी की सीधे वेबसाइट पर प्रत्येक एपीएमसी की गतिविधियों की उपलब्धता प्रदान करेगा।

केंद्र और राज्य सरकारों को किसानों से भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) एपीएमसीएस के कड़े नियमों स्थिर के शेयरों के लिए सीधे उपज खरीद पर बार-बार के आग्रह के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य के माध्यम से कृषि उपज के इस जटिल मांग-आपूर्ति संतुलन का प्रबंधन करने का प्रयास किया है। छोटे पैमाने पर किसानों, तथापि एक मुश्किल वाणिज्यिक ऑपरेशन चला रहा है।

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वैध व्यापार लाइसेंस के साथ व्यापारी/ कमीशन एजेंट के लिए ऑनलाइन पंजीकरण ट्रेडिंग पोर्टल एवं पंजीकरण प्रक्रिया

यह योजना आवेदकों को अधिकारिक वेबसाइट पर संपर्क कर सकते हैं। इस स्कीम में नाम पंजीकृत कर सकते हैं। इस योजना से संबंधित सभी विवरण संबंधित वेबसाइट पोर्टल पर क्रमबद्ध तरीके से लिए गए हैं। जो इस तरह से हैं :-

  • सर्वप्रथम उपयोग कर्ता को लिंक www.enam.gov.in या http:/enam.gov.in/NAM/home/other_register.html पर पंजीकृत आइकन द्वारा पंजीकृत कर सकते हैं।
  • मुखपृष्ठ पर रजिस्टर विकल्प पर क्लिक करना पड़ेगा।
  • पंजीकरण पृष्ठ का चयन करें, उपयुक्त एपीएमसी, जिसमें से आप व्यापार लाइसेंस पकड़ “पंजीकरण प्रकार” व्यापारी/ कमीशन एजेंट/ किसान आदि के रूप में और ड्रॉप डाउन “के साथ पंजीकरण” का चयन करें।
  • अपने सही ईमेल आईडी प्रदान करने के बाद एक लॉगिन आईडी और पासवर्ड प्राप्त होगा।
  • सफल पंजीकरण के बाद अपनी ईमेल आईडी लॉगिन आईडी और पासवर्ड में प्राप्त होगा।
  • www.enam.gov.in पर आइकन लॉगिन पर क्लिक करके डेशबोर्ड पर लॉगइन कर अपनी प्रक्रिया की शुरुआत करें।
  • सभी आवश्यक जानकारी के साथ ई-नाम पंजीकरण फॉर्म भरे।
  • प्रेस से फार्म भरकर जमा करें।

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प्रस्तुति

चिरंजी लाल मीना, डॉ. मोहर मीना, हेमंत कुमार वर्मा,

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद,

कृषि तकनीकी अनुप्रयोग संस्थान जोन-2,

कजरी परिसर जोधपुर (राज.)

सभार

विश्व कृषि संचार

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bheru lal gaderi

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