मूँगफली की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

मूँगफली तिलहनी फसलों में से एक महत्वपूर्ण फसल हैं यह सभी प्रकार की तेल वाली फसलों में से सर्वाधिक सूखा सहन करने वाली फसल हैं, इसलिए इसे तिलहनी समूह की फसलों का “राजा” कहा जाता हैं। इसमें तेल(45-55%) एवं प्रोटीन (28-30%) अधिकता के कारण अन्य फसलों की अपेक्षा अधिक मात्रा में ऊर्जा प्रदान करती हैं।… Read More »

कद्दूवर्गीय सब्जियों में कीट एवं रोग नियंत्रण

कद्दूवर्गीय सब्जियाँ गर्मी के मौसम में तैयार होने वाली सब्जिया है। अन्य सब्जियाँ इन दिनों उपलब्ध नहीं होने के कारण बाजार में इनका अच्छा भाव मिलता है। अतः इन दिनों कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती से अच्छा लाभ प्राप्त होता है। कद्दूवर्गीय सब्जियों में मुख्यतया कद्दू, करेला, लौकी, ककड़ी, तुरई, पेठा, परवल, टिण्डा, खीरा आदि प्रमुख… Read More »

खजूर फल-पोषक सरंचना एवं औषधीय गुण

खजूर विश्व के सबसे पौष्टिक फलों में से एक है। सदियों से यह मध्यपूर्व एशिया उत्तरी अफ्रीका के रेगिस्तानी इलाकों का प्रमुख भोजन बना हुआ है। अरब देशों में पैदा होने वाला स्वादिष्ट खजूर एक पौष्टिक मेवा है जो सेहत की दृष्टि से बहुत गुणकारी है। खजूर प्रकृति का अनुपम उपहार अपने स्वाद और औषधीय… Read More »

सूरजमुखी की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

सूरजमुखी एक तिलहनी फसल हैं। देश में मूंगफली, तोरिया- सरसों एवं सोयाबीन के बाद यह चौथी महत्वपूर्ण फसल हैं। देश में सूरजमुखी को सभी मौसमों में उगाया जा सकता हैं। उतरी भारत में इसे जायद में उगाया जाता हैं। खरीफ में धान एवं रबी में गेहू की वजह से खेत खाली नहीं मिलते हैं। इसके… Read More »

अदरक की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

अदरक भारत की एक नकदी फसल हैं। विश्व के कुल उत्पादन का 60% उत्पादन भारत में होता हैं एवं इसे विदेशो को निर्यात करके काफी विदेशी मुद्रा अर्जित की जा सकती हैं। भारत में लगभग 37000 हेक्टेयर भूमि पर इस फसल को उगाकर 45000 टन शुद्ध उतपादन प्राप्त होता हैं। भारत में इस फसल की… Read More »

अधिक उत्पादन के लिए आधुनिक कृषि पद्धतियाँ

कृषि के बदलते परिवेश में, बढ़ते तापमान, पर्यावरण प्रदूषण, मृदा ह्रास एवं बीमारियों के प्रकोप को कम करने के लिए उन्नत एवं स्वच्छ क्रियाओं को अपनाना आवश्यक है। कृषि उत्पादन के प्रत्येक पहलुओं जैसे खेत की तैयारी, खेत का चुनाव, खरपतवार नियंत्रण, पौध सरंक्षण, फसलोत्तर प्रबंधन, फसल कटाई, कृषि पद्धतियाँ महत्वपूर्ण  हैं। सुथरी कृषि पद्धतियाँ … Read More »

रासायनिक उर्वरक प्रयोग,महत्व एवं उपयोग विधि

मृदा में जिन पोषक तत्वों की कमी होती है उन्ही के अनुसार उपयुक्त उर्वरक उस मृदा में डालने चाहिए। लेकिन फसलों द्वारा उनका कृषक उपयोग उर्वरकों के डालने की विधि तथा समय पर निर्भर करता है। अधिकांश मृदाओं का उर्वरक स्तर कम होने के कारण उन पर उर्वरकों के प्रयोग का असर शीघ्र होता है।… Read More »

मूँग की उन्नत खेती एवं फसल सुरक्षा उपाय

मूँग का प्रयोग मुख्य रूप से दालों के रूप में होता है और प्रोटीन का एक प्रमुख स्रोत है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ में खरीफ के मौसम में मूँग की खेती 19.28 हजार हेक्टेयर में की जाती हैं, रबी के मौसम में मूँग की खेती 23.79 हजार हेक्टेयर में की जाती हैं इसका औसतन उत्पादन 350-… Read More »

जैविक खेती – फसल उत्पादन एवं महत्व

जैविक खेती देसी खेती का उन्नत तरीका है। जहाँ प्रकृति व पर्यावरण को संतुलित रखते हुए खेती की जाती है। इसमें रसायनिक खाद, कीटनाशकों का उपयोग नहीं करते हैं खेत में गोबर की खाद, कम्पोस्ट, जीवाणु खाद, फसल अवशेष , फसल चक्र एवं प्रकृति में उपलब्ध खनिज जैसे रॉक फॉस्फेट, जिप्सम आदि से पौधों को… Read More »

हल्दी की उन्नत खेती एवं बीज संरक्षण,प्रक्रियाकरण(क्योरिंग)

इसकी मूल जड़ में अदरक के सामान कन्द होते हे जिसे हल्दी कहते हैं। हल्दी एक बहुवर्षीय शाकीय पौधा हैं इसका  वानस्पतिक नाम कुरकुमा लोंगा हैं एवं जिंजिवरेंसी कुल का सदस्य हैं। हल्दी का मूल स्थान भारत ही माना जाता हैं। इसका पौधा भारत में प्रत्येक स्थान पर पाया जाता हैं। भारत की विभिन्न मसाले… Read More »